Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Jan 2023 · 1 min read

मुस्कराता चेहरा

ज़माने को दिखता है मुस्कुराता चेहरा
अकेले में रहता है आंसू बहाता चेहरा

ये भी क्या जरूरी है के
हम सोग का जश्न
मनाए
देखते है कैसा होता है
दुख में बदलता चेहरा

काश के उस को मेरा
खयाल ही आ जाता
किसी लम्हा
उस का भी मैं देखती
एहसास से मलमलाता चेहरा

क्या हुआ हम
जो अकेले पढ़ गये है
तुम नहीं साथ तो
साथ तन्हाई में होगी
तुम्हारी याद
सोच कर यही बात नहीं
घबराता चेहरा
इस दुनिया मे आए
अकेले
जाएंगे भी अकेले
जिस ने जब
तक साथ दिया
उसका बहुत शुक्रिया
इसलिए हम तो
रखेगे
मुस्कराता चेहरा

Language: Hindi
145 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from shabina. Naaz
View all
You may also like:
■ आज का शेर शुभ-रात्रि के साथ।
■ आज का शेर शुभ-रात्रि के साथ।
*प्रणय प्रभात*
चिट्ठी   तेरे   नाम   की, पढ लेना करतार।
चिट्ठी तेरे नाम की, पढ लेना करतार।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
एक अदद इंसान हूं
एक अदद इंसान हूं
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
ड्रीम इलेवन
ड्रीम इलेवन
आकाश महेशपुरी
13, हिन्दी- दिवस
13, हिन्दी- दिवस
Dr Shweta sood
लक्ष्य
लक्ष्य
लक्ष्मी सिंह
तेरी जुल्फों के साये में भी अब राहत नहीं मिलती।
तेरी जुल्फों के साये में भी अब राहत नहीं मिलती।
Phool gufran
दो पल की खुशी और दो पल का ही गम,
दो पल की खुशी और दो पल का ही गम,
Soniya Goswami
प्रथम नमन मात पिता ने, गौरी सुत गजानन काव्य में बैगा पधारजो
प्रथम नमन मात पिता ने, गौरी सुत गजानन काव्य में बैगा पधारजो
Anil chobisa
बहुत कुछ बदल गया है
बहुत कुछ बदल गया है
Davina Amar Thakral
रिश्तों में...
रिश्तों में...
Shubham Pandey (S P)
सफल लोगों की अच्छी आदतें
सफल लोगों की अच्छी आदतें
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
अपनी काविश से जो मंजिल को पाने लगते हैं वो खारज़ार ही गुलशन बनाने लगते हैं। ❤️ जिन्हे भी फिक्र नहीं है अवामी मसले की। शोर संसद में वही तो मचाने लगते हैं।
अपनी काविश से जो मंजिल को पाने लगते हैं वो खारज़ार ही गुलशन बनाने लगते हैं। ❤️ जिन्हे भी फिक्र नहीं है अवामी मसले की। शोर संसद में वही तो मचाने लगते हैं।
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
अपने किरदार को किसी से कम आकना ठीक नहीं है .....
अपने किरदार को किसी से कम आकना ठीक नहीं है .....
कवि दीपक बवेजा
ମଣିଷ ଠାରୁ ଅଧିକ
ମଣିଷ ଠାରୁ ଅଧିକ
Otteri Selvakumar
अगर बात तू मान लेगा हमारी।
अगर बात तू मान लेगा हमारी।
सत्य कुमार प्रेमी
*कोटा-परमिट का मिला ,अफसर को हथियार* *(कुंडलिया)*
*कोटा-परमिट का मिला ,अफसर को हथियार* *(कुंडलिया)*
Ravi Prakash
ये उम्र के निशाँ नहीं दर्द की लकीरें हैं
ये उम्र के निशाँ नहीं दर्द की लकीरें हैं
Atul "Krishn"
प्यार की कलियुगी परिभाषा
प्यार की कलियुगी परिभाषा
Mamta Singh Devaa
बिना चले गन्तव्य को,
बिना चले गन्तव्य को,
sushil sarna
क्यों मुश्किलों का
क्यों मुश्किलों का
Dr fauzia Naseem shad
हे राम ।
हे राम ।
Anil Mishra Prahari
मैं ज़िंदगी के सफर मे बंजारा हो गया हूँ
मैं ज़िंदगी के सफर मे बंजारा हो गया हूँ
Bhupendra Rawat
" तुम्हारी जुदाई में "
Aarti sirsat
सच तो रंग होते हैं।
सच तो रंग होते हैं।
Neeraj Agarwal
सिर्फ़ वादे ही निभाने में गुज़र जाती है
सिर्फ़ वादे ही निभाने में गुज़र जाती है
अंसार एटवी
" भूलने में उसे तो ज़माने लगे "
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
2848.*पूर्णिका*
2848.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
सजि गेल अयोध्या धाम
सजि गेल अयोध्या धाम
मनोज कर्ण
मेरे लिए
मेरे लिए
Shweta Soni
Loading...