Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
24 May 2024 · 1 min read

मुझे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान हैं बहुत लोग,

मुझे ऊंचाइयों पर देखकर हैरान हैं बहुत लोग,
पर किसी ने मेरे पैरों के छाले नहीं देखे।

1 Like · 31 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
प्रेम।की दुनिया
प्रेम।की दुनिया
भरत कुमार सोलंकी
मैं तुझे खुदा कर दूं।
मैं तुझे खुदा कर दूं।
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
"कभी"
Dr. Kishan tandon kranti
जिन्दगी के हर सफे को ...
जिन्दगी के हर सफे को ...
Bodhisatva kastooriya
राम
राम
Sanjay ' शून्य'
कान्हा घनाक्षरी
कान्हा घनाक्षरी
Suryakant Dwivedi
जीवन और मृत्यु के मध्य, क्या उच्च ये सम्बन्ध है।
जीवन और मृत्यु के मध्य, क्या उच्च ये सम्बन्ध है।
Manisha Manjari
दोहा बिषय- दिशा
दोहा बिषय- दिशा
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
*** चोर ***
*** चोर ***
Chunnu Lal Gupta
बिटिया विदा हो गई
बिटिया विदा हो गई
नवीन जोशी 'नवल'
#drarunkumarshastri
#drarunkumarshastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
जुदाई की शाम
जुदाई की शाम
Shekhar Chandra Mitra
घड़ियाली आँसू
घड़ियाली आँसू
Dr. Pradeep Kumar Sharma
उम्मीद रखते हैं
उम्मीद रखते हैं
Dhriti Mishra
जन्मदिवस विशेष 🌼
जन्मदिवस विशेष 🌼
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
वो तीर ए नजर दिल को लगी
वो तीर ए नजर दिल को लगी
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
हर सीज़न की
हर सीज़न की
*प्रणय प्रभात*
नवीन और अनुभवी, एकजुट होकर,MPPSC की राह, मिलकर पार करते हैं।
नवीन और अनुभवी, एकजुट होकर,MPPSC की राह, मिलकर पार करते हैं।
पूर्वार्थ
गांव की गौरी
गांव की गौरी
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
नए साल का सपना
नए साल का सपना
Lovi Mishra
~ हमारे रक्षक~
~ हमारे रक्षक~
करन ''केसरा''
यादों के झरोखों से...
यादों के झरोखों से...
मनोज कर्ण
ज़िंदगी मोजिज़ा नहीं
ज़िंदगी मोजिज़ा नहीं
Dr fauzia Naseem shad
जन्मदिन मुबारक तुम्हें लाड़ली
जन्मदिन मुबारक तुम्हें लाड़ली
gurudeenverma198
* पत्ते झड़ते जा रहे *
* पत्ते झड़ते जा रहे *
surenderpal vaidya
माँ शारदे
माँ शारदे
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
भस्मासुर
भस्मासुर
आनन्द मिश्र
इस घर से .....
इस घर से .....
sushil sarna
उसी पथ से
उसी पथ से
Kavita Chouhan
*जाता सूरज शाम का, आता प्रातः काल (कुंडलिया)*
*जाता सूरज शाम का, आता प्रातः काल (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
Loading...