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26 Nov 2023 · 1 min read

मुक्तक

सहर होने से पहले चिराग़ बुझा देता हूँ ।

..अक्स तेरा अपनी पलकों में छुपा लेता हूँ ।

…..हर कतरे से तेरी याद और भी बढ़ जाती है –

……..बेबसी के आलम में .दो अश्क बहा लेता हूँ ।

सुशील सरना

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