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30 May 2016 · 1 min read

मुक्तक

अम्बर को चूमे है बेटी

ग़म में भी झूमे है बेटी

घर के सूने से आँगन में

बन पुरवा घूमे है बेटी

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
258 Views
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