Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Feb 25, 2019 · 1 min read

मुक्तक

मेरे दिल को सुकून क्यों नहीं
कुछ टुटा है क्या ?
मेरे दिल के पिंजर में
दो नाम
चीख़ कि तरह आया है
चित्रकूट की गलियों से !
।।सिद्धार्थ।।

4 Likes · 248 Views
You may also like:
जिंदगी को खामोशी से गुज़ारा है।
Taj Mohammad
" बहू और बेटी "
Dr Meenu Poonia
महाराष्ट्र की स्थिती
बिमल
Waqt
ananya rai parashar
कवि का कवि से
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
जिंदगी की अभिलाषा
Dr.Alpa Amin
एक शहीद की महबूबा
ओनिका सेतिया 'अनु '
बरसात
Ashwani Kumar Jaiswal
ज़मीं की गोद में
Dr fauzia Naseem shad
"सुकून की तलाश"
Ajit Kumar "Karn"
पिता
Mamta Rani
गंगा अवतरण
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
सच और झूठ
श्री रमण 'श्रीपद्'
लहजा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मुझे तुम्हारी जरूरत नही...
Sapna K S
जो खुद ही टूटा वो क्या मुराद देगा मुझको
Krishan Singh
हे शिव ! सृष्टि भरो शिवता से
Saraswati Bajpai
तब से भागा कोलेस्ट्रल
श्री रमण 'श्रीपद्'
बारिश हमसे रूढ़ गई
Dr.Alpa Amin
मजहबे इस्लाम नही सिखाता।
Taj Mohammad
गुलमोहर
Ram Krishan Rastogi
"मैं फ़िर से फ़ौजी कहलाऊँगा"
Lohit Tamta
अम्मा/मम्मा
Manu Vashistha
स्वर कोकिला
AMRESH KUMAR VERMA
साहित्यकारों से
Rakesh Pathak Kathara
हमारी ग़ज़लों पर झूमीं जाती है
Vinit kumar
【28】 *!* अखरेगी गैर - जिम्मेदारी *!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
हम जिधर जाते हैं
Dr fauzia Naseem shad
✍️बसेरा✍️
"अशांत" शेखर
【34】*!!* आग दबाये मत रखिये *!!*
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
Loading...