Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Aug 2016 · 2 min read

माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला………………..

देश प्रेम की धुन बजाता आज फिर निकला वीरो का डोला !
संग में उनके मैं भी जाऊं, माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला

राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह
दहाड़े थे आजाद बनकर सिंह
मैं भी उनके पथ पर चलकर
मनवाऊँ अपने नाम का लोहा !

देश प्रेम की धुन बजाता आज फिर निकला वीरो का डोला !
संग में उनके मैं भी जाऊं, माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला !!

गाँधी, पटेल, बहादुर के जैसा
बन जाऊं माँ ,मैं भी उन जैसा
देश के खातिर प्राण त्यागकर
बना लूंगा सुभाष के जैसी सेना !

देश प्रेम की धुन बजाता आज फिर निकला वीरो का डोला !
संग में उनके मैं भी जाऊं, माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला !!

जब कभी भी हो खतरे में माता
पल भर मुझको चैन ना आता
टूट पडूंगा मैं दुश्मन पर नीडर
बाँध सीने पर बारूद का गोला !

देश प्रेम की धुन बजाता आज फिर निकला वीरो का डोला !
संग में उनके मैं भी जाऊं, माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला !!

सबसे सुन्दर, सबसे प्यारा
दुनिया में जो सबसे न्यारा
देश विदेश में किधर नही है
मेरे “भारत” नाम का रोला !

देश प्रेम की धुन बजाता आज फिर निकला वीरो का डोला !
संग में उनके मैं भी जाऊं, माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला !!

भारत माता जान से प्यारी
इस पर वीरो ने जान वारी
नजर उठाकर कोई जो देखे
मैं बन जाऊँगा दहकता शोला !

देश प्रेम की धुन बजाता आज फिर निकला वीरो का डोला !
संग में उनके मैं भी जाऊं, माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला !!

जब हाथ में लेकर चलू तिरंगा
दुश्मन का मन क्यूँ होता गंदा
संग लड़ी थी आजादी की जंग
खून भी सबका संग था खोला !

देश प्रेम की धुन बजाता आज फिर निकला वीरो का डोला !
संग में उनके मैं भी जाऊं, माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला !!

एक आसमान था, एक थी जननी
फिर जाने क्यूँ हम दुश्मन बन बैठे
संग में जो हम तुम जो मिल जाये
फिर देखे कैसे दुनिया हम पर ऐठें
मिट जायेगा आतंकवाद का रोना

देश प्रेम की धुन बजाता आज फिर निकला वीरो का डोला !
संग में उनके मैं भी जाऊं, माँ मेरा भी रंग दो बसंती चोला !!

!
!
!
रचनाकार ::->> डी. के. निवातियाँ _________!!!!!!!

Language: Hindi
Tag: गीत
1 Like · 1 Comment · 686 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
अंधेरा कभी प्रकाश को नष्ट नहीं करता
अंधेरा कभी प्रकाश को नष्ट नहीं करता
हिमांशु Kulshrestha
कभी जब आपका दीदार होगा
कभी जब आपका दीदार होगा
सत्य कुमार प्रेमी
अकेला खुदको पाता हूँ.
अकेला खुदको पाता हूँ.
Naushaba Suriya
नदी तट पर मैं आवारा....!
नदी तट पर मैं आवारा....!
VEDANTA PATEL
बाजार में जरूर रहते हैं साहब,
बाजार में जरूर रहते हैं साहब,
Sanjay ' शून्य'
गरीबी और लाचारी
गरीबी और लाचारी
Mukesh Kumar Sonkar
“जगत जननी: नारी”
“जगत जननी: नारी”
Swara Kumari arya
मेरे तात !
मेरे तात !
Akash Yadav
दुनिया की ज़िंदगी भी
दुनिया की ज़िंदगी भी
shabina. Naaz
वसंत ऋतु
वसंत ऋतु
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
खुद पर यकीन,
खुद पर यकीन,
manjula chauhan
सुभाष चन्द्र बोस
सुभाष चन्द्र बोस
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
करुंगा अब मैं वही, मुझको पसंद जो होगा
करुंगा अब मैं वही, मुझको पसंद जो होगा
gurudeenverma198
.......,,
.......,,
शेखर सिंह
वर्षों पहले लिखी चार पंक्तियां
वर्षों पहले लिखी चार पंक्तियां
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
अपने किरदार में
अपने किरदार में
Dr fauzia Naseem shad
"पँछियोँ मेँ भी, अमिट है प्यार..!"
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
2487.पूर्णिका
2487.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
समझ ना आया
समझ ना आया
Dinesh Kumar Gangwar
*अध्याय 6*
*अध्याय 6*
Ravi Prakash
चलो माना तुम्हें कष्ट है, वो मस्त है ।
चलो माना तुम्हें कष्ट है, वो मस्त है ।
Dr. Man Mohan Krishna
उनका ही बोलबाला है
उनका ही बोलबाला है
मानक लाल मनु
"शब्द"
Dr. Kishan tandon kranti
बुद्ध होने का अर्थ
बुद्ध होने का अर्थ
महेश चन्द्र त्रिपाठी
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Jitendra Kumar Noor
।। श्री सत्यनारायण ब़त कथा महात्तम।।
।। श्री सत्यनारायण ब़त कथा महात्तम।।
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
शुभ प्रभात मित्रो !
शुभ प्रभात मित्रो !
Mahesh Jain 'Jyoti'
■ क़ुदरत से खिलवाड़ खुद से खिलवाड़। छेड़ोगे तो छोड़ेगी नहीं।
■ क़ुदरत से खिलवाड़ खुद से खिलवाड़। छेड़ोगे तो छोड़ेगी नहीं।
*प्रणय प्रभात*
कभी मोहब्बत के लिए मरता नहीं था
कभी मोहब्बत के लिए मरता नहीं था
Rituraj shivem verma
मुक्कमल कहां हुआ तेरा अफसाना
मुक्कमल कहां हुआ तेरा अफसाना
Seema gupta,Alwar
Loading...