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1 Oct 2022 · 1 min read

माँ दुर्गा।

माता अपने भक्त को, रखना दिल के पास
हे जननी कात्यायनी, विनती करता दास ।

माता तेरे हाथ में, साँसों की है डोर
नौका बिन पतवार के, जाएगी किस ओर!

पूजा – अर्चा, आरती, निशि – दिन करूँ भवानी
हरो कष्ट, भय, त्रास माँ, तुम भव की कल्याणी ।

जिसके सर परमेश्वरी, तुम जो रख दे हाथ
चिंता फिर किस बात की, जग जो छोड़े साथ ।

पथ-पथ दानव दल खड़े, पग-पग पर संत्रास
अघ, अकर्म, अन्याय का, माता करतीं नाश ।

तुम पोषक माँ विश्व की, सारा जग है दास
तेरे बल, उपकार पर, टिकी धरा, आकाश ।
Anil Mishra Prahari

Language: Hindi
413 Views
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