Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 May 2024 · 1 min read

महसूस करो

महसूस करो दिल से
बस रिश्ते की गहराई ,
कोई खून से जुड़ता है
कोई एहसास से जुड़ता है ।
डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
Tag: शेर
2 Likes · 42 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all
You may also like:
ये साल भी इतना FAST गुजरा की
ये साल भी इतना FAST गुजरा की
Ranjeet kumar patre
हिंदीग़ज़ल में होता है ऐसा ! +रमेशराज
हिंदीग़ज़ल में होता है ऐसा ! +रमेशराज
कवि रमेशराज
পৃথিবী
পৃথিবী
Otteri Selvakumar
कभी हमको भी याद कर लिया करो
कभी हमको भी याद कर लिया करो
gurudeenverma198
रिश्ते
रिश्ते
पूर्वार्थ
ज़िद से भरी हर मुसीबत का सामना किया है,
ज़िद से भरी हर मुसीबत का सामना किया है,
Kanchan Alok Malu
काव्य
काव्य
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
हम सभी केवल अपने लिए जीते और सोचते हैं।
हम सभी केवल अपने लिए जीते और सोचते हैं।
Neeraj Agarwal
तुम नि:शब्द साग़र से हो ,
तुम नि:शब्द साग़र से हो ,
Stuti tiwari
अनंत की ओर _ 1 of 25
अनंत की ओर _ 1 of 25
Kshma Urmila
जीवन मार्ग आसान है...!!!!
जीवन मार्ग आसान है...!!!!
Jyoti Khari
श्रीराम मंगल गीत।
श्रीराम मंगल गीत।
Acharya Rama Nand Mandal
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
पिता का गीत
पिता का गीत
Suryakant Dwivedi
Compromisation is a good umbrella but it is a poor roof.
Compromisation is a good umbrella but it is a poor roof.
GOVIND UIKEY
"गुमनाम जिन्दगी ”
Pushpraj Anant
प्यार
प्यार
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
नारी तेरे रूप अनेक
नारी तेरे रूप अनेक
विजय कुमार अग्रवाल
*कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है (गीत)*
*कभी जिंदगी अच्छी लगती, कभी मरण वरदान है (गीत)*
Ravi Prakash
“ प्रेमक बोल सँ लोक केँ जीत सकैत छी ”
“ प्रेमक बोल सँ लोक केँ जीत सकैत छी ”
DrLakshman Jha Parimal
2812. *पूर्णिका*
2812. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
एग्जिट पोल्स वाले एनडीए को पूरी 543 सीटें दे देते, तो आज रुप
एग्जिट पोल्स वाले एनडीए को पूरी 543 सीटें दे देते, तो आज रुप
*प्रणय प्रभात*
अपनी सत्तर बरस की मां को देखकर,
अपनी सत्तर बरस की मां को देखकर,
Rituraj shivem verma
सनम की शिकारी नजरें...
सनम की शिकारी नजरें...
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
रास्ते अनेको अनेक चुन लो
रास्ते अनेको अनेक चुन लो
उमेश बैरवा
इन गज़लों का हुनर, तेरी आंखों की गुफ़्तुगू
इन गज़लों का हुनर, तेरी आंखों की गुफ़्तुगू
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
जब कोई दिल से जाता है
जब कोई दिल से जाता है
Sangeeta Beniwal
फितरत
फितरत
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
"रिश्ते की बुनियाद"
Dr. Kishan tandon kranti
Loading...