Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Jul 2023 · 1 min read

मत हवा दो आग को घर तुम्हारा भी जलाएगी

मत हवा दो आग को घर तुम्हारा भी जलाएगी
मत साथ दो हिंसा का तुम्हें भी नहीं बचाएगी
बैठ आपस में क्यों नहीं करते अमन की बात
लड़ते रहे यूं ही गर अस्तित्व भी मिटा जाएगी

संजय श्रीवास्तव
बालाघाट मध्यप्रदेश

192 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Er. Sanjay Shrivastava
View all
You may also like:
फितरत अमिट जन एक गहना
फितरत अमिट जन एक गहना
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
जीवन बरगद कीजिए
जीवन बरगद कीजिए
Mahendra Narayan
Life is a rain
Life is a rain
Ankita Patel
आप सभी सनातनी और गैर सनातनी भाईयों और दोस्तों को सपरिवार भगव
आप सभी सनातनी और गैर सनातनी भाईयों और दोस्तों को सपरिवार भगव
SPK Sachin Lodhi
रूप का उसके कोई न सानी, प्यारा-सा अलवेला चाँद।
रूप का उसके कोई न सानी, प्यारा-सा अलवेला चाँद।
डॉ.सीमा अग्रवाल
*जागा भारत चल पड़ा, स्वाभिमान की ओर (कुंडलिया)*
*जागा भारत चल पड़ा, स्वाभिमान की ओर (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
🌹Prodigy Love-31🌹
🌹Prodigy Love-31🌹
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
Ye chad adhura lagta hai,
Ye chad adhura lagta hai,
Sakshi Tripathi
जल उठी है फिर से आग नफ़रतों की ....
जल उठी है फिर से आग नफ़रतों की ....
shabina. Naaz
"परिवर्तनशीलता"
Dr. Kishan tandon kranti
हर पल ये जिंदगी भी कोई खास नहीं होती ।
हर पल ये जिंदगी भी कोई खास नहीं होती ।
Phool gufran
“अकेला”
“अकेला”
DrLakshman Jha Parimal
■ तो समझ लेना-
■ तो समझ लेना-
*Author प्रणय प्रभात*
2646.पूर्णिका
2646.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
आज सबको हुई मुहब्बत है।
आज सबको हुई मुहब्बत है।
सत्य कुमार प्रेमी
"संघर्ष "
Yogendra Chaturwedi
हमसे तुम वजनदार हो तो क्या हुआ,
हमसे तुम वजनदार हो तो क्या हुआ,
Umender kumar
ठंडक
ठंडक
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
तारिणी वर्णिक छंद का विधान
तारिणी वर्णिक छंद का विधान
Subhash Singhai
ग्लोबल वार्मिंग :चिंता का विषय
ग्लोबल वार्मिंग :चिंता का विषय
कवि अनिल कुमार पँचोली
पुरानी पेंशन
पुरानी पेंशन
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
आने जाने का
आने जाने का
Dr fauzia Naseem shad
वाचाल सरपत
वाचाल सरपत
आनन्द मिश्र
बिटिया !
बिटिया !
Sangeeta Beniwal
भांथी के विलुप्ति के कगार पर होने के बहाने / मुसाफ़िर बैठा
भांथी के विलुप्ति के कगार पर होने के बहाने / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
" पलास "
Pushpraj Anant
* नदी की धार *
* नदी की धार *
surenderpal vaidya
माँ जब भी दुआएं देती है
माँ जब भी दुआएं देती है
Bhupendra Rawat
पुस्तक समीक्षा- उपन्यास विपश्यना ( डॉ इंदिरा दांगी)
पुस्तक समीक्षा- उपन्यास विपश्यना ( डॉ इंदिरा दांगी)
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
हमेशा भरा रहे खुशियों से मन
हमेशा भरा रहे खुशियों से मन
कवि दीपक बवेजा
Loading...