Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame

मकान की यादे

मकान का बाहरी कमरा जहाँ दादा जी रहते थे|
ना जाने सोते थे कब, बस जागते रहते थे
पिताजी डाँटते थे जब भी मुझे दादा जी बचाते थे
तुझसे कम सैतान है पापा से कहते थे
कमरे के बीच मे तखत पर दादा जी और उनकी छड़ी रहती थी
दाई तरफ दीवार मे एक दराज मे एक घड़ी रहती थी
दादाजी थे तो घर पर ,लगता था हमेशा एक पहरा था
रिश्तो को संजोये रखने का,हुनर उनके पास गहरा था
अब तो वहाँ बस उनकी तस्वीर और कुछ याद रहती है
जिसमे चेहरे की चमक कुछ धूल से धुंधली सी हो गयी है
कभी पापा साफ करते है कभी हवा साफ कर जाती है
घर मे कोई और तो बात नही करता
लगता है हवा ही दादाजी से कुछ बात कर जाती है ||

सुबह वो उसका ची-2 करके सबको उठा जाना
ज़रा सी आहट होने पर फुर्र से उड़ जाना
मकान के आँगन मे चिड़िया एक घोसला बनाती थी
दिन भर दाना चुंगती, नन्हे बच्‍चों को चुगांती थी
पर अब चिड़िया ने खुद को आँगन मे आने से रोक लिया है
क्यो की घर के आगन को उपरी मंज़िल की छत ने ढक लिया है
मकान की उपरी छत पर कुछ किरायेदार रहते है
जिनसे अब कुछ किराया और कुछ शोर आता है||

मकान का वो कमरा जहाँ पढ़ा करता था मै और भाई
किताब कापियो के अलावा वहाँ दिखता नही कोई
किताबो की जगह अब कम्प्यूटर तन्त्र ने लेली
पहले विधयालय नही जाते थे किताबो के बहाने से
अब बड़े-२ काम हो जाते है एक क्लिक दबाने से||

आज किताबो को पलटा मैने धूल हटाने के बहाने से
सूखा गुलाब निकला जो अमानत था किसी की एक जमाने से
किताबो के पन्नो पर जिनका नाम लिख रखा था
अब वो नाम काम आते है लॅपटॉप का पासवर्ड बनाने मे

जब किताबो की जगह ई-बुक ने ले ली
तो सोचता हूँ की इन सब किताबो का क्या होगा
हर पन्ने मे दफ़न कोई याद,ख्वाबो का क्या होगा
किताबो मे छिपी कहानियो के फरिस्तो का क्या होगा
किताबे माँगने गिरने उठाने के बहाने जो रिस्ते बनते थे अब उन
रिस्तो का क्या होगा||
© शिवदत्त श्रोत्रिय

321 Views
You may also like:
He is " Lord " of every things
Ram Ishwar Bharati
दिल की ख्वाहिशें।
Taj Mohammad
गोरे मुखड़े पर काला चश्मा
श्री रमण
विश्व पुस्तक दिवस पर पुस्तको की वेदना
Ram Krishan Rastogi
मां का आंचल
VINOD KUMAR CHAUHAN
अगर तुम खुश हो।
Taj Mohammad
जीने की चाहत है सीने में
Krishan Singh
सुबह
AMRESH KUMAR VERMA
बस एक ही भूख
DESH RAJ
बदलती परम्परा
Anamika Singh
💐 देह दलन 💐
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ए बदरी
Dhirendra Panchal
अभी दुआ में हूं बद्दुआ ना दो।
Taj Mohammad
जल जीवन - जल प्रलय
Rj Anand Prajapati
【29】!!*!! करवाचौथ !!*!!
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
मेरा अक्स तो आब है।
Taj Mohammad
पिता खुशियों का द्वार है।
Taj Mohammad
*देखने लायक नैनीताल (गीत)*
Ravi Prakash
किसको बुरा कहें यहाँ अच्छा किसे कहें
Dr Archana Gupta
स्वाधीनता
AMRESH KUMAR VERMA
* फितरत *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
रफ्तार
Anamika Singh
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
# हे राम ...
Chinta netam " मन "
फूलों की वर्षा
Pt. Brajesh Kumar Nayak
उस पथ पर ले चलो।
Buddha Prakash
बाबा भैरण के जनैत छी ?
श्रीहर्ष आचार्य
.....उनके लिए मैं कितना लिखूं?
ऋचा त्रिपाठी
मुक्तक- जो लड़ना भूल जाते हैं...
आकाश महेशपुरी
मज़ाक बन के रह गए हैं।
Taj Mohammad
Loading...