Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Feb 2024 · 1 min read

भटके नौजवानों से

तुम क्यों भटक गए?
तुम्हें भी तो उन्ही ने
संस्कार दिए हैं,
जिससे ये पावन संस्कार
सबको है मिले।
संबंधों की ऊर्जा
क्यों नहीं समझी
जबकि उन्होंने सिखाया
संबंधों को जीना।
राखी की डोर भी
बाॅंध न सकी तुमको
तुम्हें वह पवित्र बंधन
क्यों रास ना आया?
पग -पग पर स्नेह मिला
फिर भी तुम में
आक्रोश फूल बन खिला।
तुम भटक गए हो
सब कुछ होते हुए भी
पावन संस्कार
परिवार का प्यार।
फिर उनसे कैसी शिकायत
जो पलते ही कीचड़ में
उनमें भी खिलता है
सुवासित स्नेह कॅंवल।
मगर,तुम नहीं हो अब
उस पावन स्नेह
के अधिकारी
जिसे देहधारी
संबोधन देते हैं—
‘माॅं’ और ‘बहिन’
क्योंकि
तुम भटक गए हो।
संबंधों की गरिमा
तुम्हारे लिए
मायने नहीं रखती
क्योंकि
तुम अपनी भौतिकतावादी
लालसाओं में हो गए हो अंधे।
मगर जब कभी लौटी
अन्तस् की रोशनी
तुम बहुत पछताओगे
तुम बहुत पछताओगे।

—प्रतिभा आर्य
चेतन एनक्लेव,
अलवर(राजस्थान)

Language: Hindi
2 Likes · 279 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from PRATIBHA ARYA (प्रतिभा आर्य )
View all
You may also like:
ग़र कुंदन जैसी चमक चाहते हो पाना,
ग़र कुंदन जैसी चमक चाहते हो पाना,
SURYA PRAKASH SHARMA
खून-पसीने के ईंधन से, खुद का यान चलाऊंगा,
खून-पसीने के ईंधन से, खुद का यान चलाऊंगा,
डॉ. अनिल 'अज्ञात'
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
डॉ अरुण कुमार शास्त्री
DR ARUN KUMAR SHASTRI
तेरी यादें
तेरी यादें
Neeraj Agarwal
जादू था या तिलिस्म था तेरी निगाह में,
जादू था या तिलिस्म था तेरी निगाह में,
Shweta Soni
तेरे इंतज़ार में
तेरे इंतज़ार में
Surinder blackpen
"वायदे"
Dr. Kishan tandon kranti
💐प्रेम कौतुक-363💐
💐प्रेम कौतुक-363💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
उसका आना
उसका आना
हिमांशु Kulshrestha
करता नहीं हूँ फिक्र मैं, ऐसा हुआ तो क्या होगा
करता नहीं हूँ फिक्र मैं, ऐसा हुआ तो क्या होगा
gurudeenverma198
3313.⚘ *पूर्णिका* ⚘
3313.⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
#साहित्यपीडिया
#साहित्यपीडिया
*Author प्रणय प्रभात*
प्रेम.....
प्रेम.....
शेखर सिंह
बचपन
बचपन
लक्ष्मी सिंह
मेरे होते हुए जब गैर से वो बात करती हैं।
मेरे होते हुए जब गैर से वो बात करती हैं।
सत्य कुमार प्रेमी
पर्दाफाश
पर्दाफाश
Shekhar Chandra Mitra
ज़िंदगी को इस तरह
ज़िंदगी को इस तरह
Dr fauzia Naseem shad
सोच
सोच
Srishty Bansal
भारत माता की संतान
भारत माता की संतान
Ravi Yadav
सैनिक
सैनिक
Mamta Rani
मौसम मौसम बदल गया
मौसम मौसम बदल गया
The_dk_poetry
कविता का प्लॉट (शीर्षक शिवपूजन सहाय की कहानी 'कहानी का प्लॉट' के शीर्षक से अनुप्रेरित है)
कविता का प्लॉट (शीर्षक शिवपूजन सहाय की कहानी 'कहानी का प्लॉट' के शीर्षक से अनुप्रेरित है)
Dr MusafiR BaithA
** जिंदगी  मे नहीं शिकायत है **
** जिंदगी मे नहीं शिकायत है **
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
कौन है जिम्मेदार?
कौन है जिम्मेदार?
Pratibha Pandey
कोई आपसे तब तक ईर्ष्या नहीं कर सकता है जब तक वो आपसे परिचित
कोई आपसे तब तक ईर्ष्या नहीं कर सकता है जब तक वो आपसे परिचित
Rj Anand Prajapati
माना के तू बेमिसाल है
माना के तू बेमिसाल है
shabina. Naaz
आलता महावर
आलता महावर
Pakhi Jain
माँ के बिना घर आंगन अच्छा नही लगता
माँ के बिना घर आंगन अच्छा नही लगता
Basant Bhagawan Roy
जमाने की नजरों में ही रंजीश-ए-हालात है,
जमाने की नजरों में ही रंजीश-ए-हालात है,
manjula chauhan
Loading...