Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 May 2024 · 1 min read

‌‌भक्ति में शक्ति

भक्ति में शक्ति , शक्ति में भक्ति
न मानी तो हो जाएगी विरक्ति
वेदांत में सिद्धांत , सिद्धांत में वेदांत
न माना तो हो जाएगा अंत
अच्छाई में सच्चाई , सच्चाई में अच्छाई
न मानी तो हो जाएगी बुराई
काम में दाम , दाम में काम
न माना तो हो जाएगा बेकाम
गीत में संगीत , संगीत में गीत
माना तो मिल जाएगा मनमीत
मेहनत में सेहत , सेहत में मेहनत
न माना तो चली जाएगी बरकत
पढ़ाई में भलाई , भलाई में पढ़ाई
न माना तो हो जाएगी लड़ाई
अनुलोम में ओम , ओम् में विलोम
मान लिया तो खुश हो जाए व्योम

ओमप्रकाश भारती ओम्
बालाघाट मध्यप्रदेश

Language: Hindi
38 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from ओमप्रकाश भारती *ओम्*
View all
You may also like:
अक्सर यूं कहते हैं लोग
अक्सर यूं कहते हैं लोग
Harminder Kaur
बहती नदी का करिश्मा देखो,
बहती नदी का करिश्मा देखो,
Buddha Prakash
इश्क़ का माया जाल बिछा रही है ये दुनिया,
इश्क़ का माया जाल बिछा रही है ये दुनिया,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
"महत्वाकांक्षा"
Dr. Kishan tandon kranti
मेरी जिंदगी भी तुम हो,मेरी बंदगी भी तुम हो
मेरी जिंदगी भी तुम हो,मेरी बंदगी भी तुम हो
कृष्णकांत गुर्जर
बहाना मिल जाए
बहाना मिल जाए
Srishty Bansal
** मन में यादों की बारात है **
** मन में यादों की बारात है **
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
*
*"गंगा"*
Shashi kala vyas
प्रेमी चील सरीखे होते हैं ;
प्रेमी चील सरीखे होते हैं ;
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
एक महिला तब ज्यादा रोती है जब उसके परिवार में कोई बाधा या फि
एक महिला तब ज्यादा रोती है जब उसके परिवार में कोई बाधा या फि
Rj Anand Prajapati
कसम, कसम, हाँ तेरी कसम
कसम, कसम, हाँ तेरी कसम
gurudeenverma198
👌🏼वक़्त का तक़ाज़ा👌
👌🏼वक़्त का तक़ाज़ा👌
*प्रणय प्रभात*
मुफलिसों को जो भी हॅंसा पाया।
मुफलिसों को जो भी हॅंसा पाया।
सत्य कुमार प्रेमी
*मरता लेता जन्म है, प्राणी बारंबार (कुंडलिया)*
*मरता लेता जन्म है, प्राणी बारंबार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
कितने अच्छे भाव है ना, करूणा, दया, समर्पण और साथ देना। पर जब
कितने अच्छे भाव है ना, करूणा, दया, समर्पण और साथ देना। पर जब
पूर्वार्थ
जिस पर हँसी के फूल,कभी बिछ जाते थे
जिस पर हँसी के फूल,कभी बिछ जाते थे
Shweta Soni
*अज्ञानी की कलम*
*अज्ञानी की कलम*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
नई शुरुआत
नई शुरुआत
Neeraj Agarwal
बीन अधीन फणीश।
बीन अधीन फणीश।
Neelam Sharma
शब्द✍️ नहीं हैं अनकहे😷
शब्द✍️ नहीं हैं अनकहे😷
डॉ० रोहित कौशिक
तुम याद आये !
तुम याद आये !
Ramswaroop Dinkar
"" *हे अनंत रूप श्रीकृष्ण* ""
सुनीलानंद महंत
प्रार्थना
प्रार्थना
Shally Vij
ख्याल
ख्याल
अखिलेश 'अखिल'
Drapetomania
Drapetomania
Vedha Singh
नव कोंपलें स्फुटित हुई, पतझड़ के पश्चात
नव कोंपलें स्फुटित हुई, पतझड़ के पश्चात
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
विरहणी के मुख से कुछ मुक्तक
विरहणी के मुख से कुछ मुक्तक
Ram Krishan Rastogi
जुदाई की शाम
जुदाई की शाम
Shekhar Chandra Mitra
संक्रांति
संक्रांति
Harish Chandra Pande
परिभाषा संसार की,
परिभाषा संसार की,
sushil sarna
Loading...