Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Apr 2023 · 1 min read

बोझ हसरतों का – मुक्तक

क़ता ( मुक्तक ) :-

हसरतों का बोझ लिए फिरती है ।
नदी जैसे सागर में कोई गिरती है ।।
ये ज़िंदगी भी इक तमाशा है साहिब ।
जीने के वास्ते रोज़ रोज़ मरती है ।।

© डॉ वासिफ काज़ी इंदौर
© काज़ी की कलम

Language: Hindi
282 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
आज कल कुछ इस तरह से चल रहा है,
आज कल कुछ इस तरह से चल रहा है,
kumar Deepak "Mani"
​जिंदगी के गिलास का  पानी
​जिंदगी के गिलास का पानी
Atul "Krishn"
तुम भी पत्थर
तुम भी पत्थर
shabina. Naaz
"सपने बिकते हैं"
Dr. Kishan tandon kranti
*लिखता है अपना भाग्य स्वयं, मानव खुद भाग्य विधाता है (राधेश्
*लिखता है अपना भाग्य स्वयं, मानव खुद भाग्य विधाता है (राधेश्
Ravi Prakash
अंधेरी रात में भी एक तारा टिमटिमाया है
अंधेरी रात में भी एक तारा टिमटिमाया है
VINOD CHAUHAN
दिए की रोशनी
दिए की रोशनी
Saraswati Bajpai
* चांद के उस पार *
* चांद के उस पार *
surenderpal vaidya
रानी लक्ष्मीबाई का मेरे स्वप्न में आकर मुझे राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करना ......(निबंध) सर्वाधिकार सुरक्षित
रानी लक्ष्मीबाई का मेरे स्वप्न में आकर मुझे राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करना ......(निबंध) सर्वाधिकार सुरक्षित
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
तुम      चुप    रहो    तो  मैं  कुछ  बोलूँ
तुम चुप रहो तो मैं कुछ बोलूँ
भवानी सिंह धानका 'भूधर'
राष्ट्र निर्माण को जीवन का उद्देश्य बनाया था
राष्ट्र निर्माण को जीवन का उद्देश्य बनाया था
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
दीप जलते रहें - दीपक नीलपदम्
दीप जलते रहें - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
माँ लक्ष्मी
माँ लक्ष्मी
Bodhisatva kastooriya
😊आज के दो रंग😊
😊आज के दो रंग😊
*प्रणय प्रभात*
कुछ हाथ भी ना आया
कुछ हाथ भी ना आया
Dalveer Singh
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Mahendra Narayan
‘ विरोधरस ‘---7. || विरोधरस के अनुभाव || +रमेशराज
‘ विरोधरस ‘---7. || विरोधरस के अनुभाव || +रमेशराज
कवि रमेशराज
रिश्ते मोबाइल के नेटवर्क जैसे हो गए हैं। कब तक जुड़े रहेंगे,
रिश्ते मोबाइल के नेटवर्क जैसे हो गए हैं। कब तक जुड़े रहेंगे,
Anand Kumar
तेरी
तेरी
Naushaba Suriya
कमीजें
कमीजें
Madhavi Srivastava
मुश्किल से मुश्किल हालातों से
मुश्किल से मुश्किल हालातों से
Vaishaligoel
यदि सत्य बोलने के लिए राजा हरिश्चंद्र को याद किया जाता है
यदि सत्य बोलने के लिए राजा हरिश्चंद्र को याद किया जाता है
शेखर सिंह
समाज सेवक पुर्वज
समाज सेवक पुर्वज
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
23/152.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/152.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
परिंदों का भी आशियां ले लिया...
परिंदों का भी आशियां ले लिया...
Shweta Soni
शायर की मोहब्बत
शायर की मोहब्बत
Madhuyanka Raj
आऊँगा कैसे मैं द्वार तुम्हारे
आऊँगा कैसे मैं द्वार तुम्हारे
gurudeenverma198
दिल के कागज़ पर हमेशा ध्यान से लिखिए।
दिल के कागज़ पर हमेशा ध्यान से लिखिए।
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
जिन्दगी की यात्रा में हम सब का,
जिन्दगी की यात्रा में हम सब का,
नेताम आर सी
जाने क्यों तुमसे मिलकर भी
जाने क्यों तुमसे मिलकर भी
Sunil Suman
Loading...