Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
9 Feb 2024 · 1 min read

बेरोजगारी के धरातल पर

अज्ञात की राहों में भटक रहे हैं,
अपने सपनों के लिए लड़ रहे हैं।
आसमान की ओर उड़ान भरने की ख्वाहिश,
पर कठिनाईयों में हैं उनकी अविरल आस।

नौकरी की तलाश में भटकते रहें,
संघर्ष के संदर्भ में संगठित होते रहें।
जीवन की दहलीज पर खड़े हैं वे,
आत्म-विश्वास की आस नहीं छोड़ने वाले हैं।

आने वाले कल की उम्मीद लिए,
सपनों की परवाह किए।
अपने कठिनाईयों का मुकाबला किए,
वे भटकते रहें, लड़ते रहें, और बढ़ते रहें।

80 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
बदलती फितरत
बदलती फितरत
Sûrëkhâ
तुम से सुबह, तुम से शाम,
तुम से सुबह, तुम से शाम,
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
सोनू की चतुराई
सोनू की चतुराई
Dr. Pradeep Kumar Sharma
भोर
भोर
Kanchan Khanna
कहमुकरी
कहमुकरी
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
सावन और स्वार्थी शाकाहारी भक्त
सावन और स्वार्थी शाकाहारी भक्त
Dr MusafiR BaithA
बाबर के वंशज
बाबर के वंशज
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
"" *गीता पढ़ें, पढ़ाएं और जीवन में लाएं* ""
सुनीलानंद महंत
यूं ही नहीं हमने नज़र आपसे फेर ली हैं,
यूं ही नहीं हमने नज़र आपसे फेर ली हैं,
ओसमणी साहू 'ओश'
"हमदर्दी"
Dr. Kishan tandon kranti
छोटे गाँव का लड़का था मै और वो बड़े शहर वाली
छोटे गाँव का लड़का था मै और वो बड़े शहर वाली
The_dk_poetry
चन्द्रयान
चन्द्रयान
Kavita Chouhan
पतझड़ और हम जीवन होता हैं।
पतझड़ और हम जीवन होता हैं।
Neeraj Agarwal
*भीड बहुत है लोग नहीं दिखते* ( 11 of 25 )
*भीड बहुत है लोग नहीं दिखते* ( 11 of 25 )
Kshma Urmila
रामेश्वरम लिंग स्थापना।
रामेश्वरम लिंग स्थापना।
Acharya Rama Nand Mandal
नवरात्रि के इस पवित्र त्योहार में,
नवरात्रि के इस पवित्र त्योहार में,
Sahil Ahmad
हर चाह..एक आह बनी
हर चाह..एक आह बनी
Priya princess panwar
■ भाषा का रिश्ता दिल ही नहीं दिमाग़ के साथ भी होता है।
■ भाषा का रिश्ता दिल ही नहीं दिमाग़ के साथ भी होता है।
*Author प्रणय प्रभात*
कुछ लोग होते है जो रिश्तों को महज़ इक औपचारिकता भर मानते है
कुछ लोग होते है जो रिश्तों को महज़ इक औपचारिकता भर मानते है
पूर्वार्थ
शीर्षक : पायजामा (लघुकथा)
शीर्षक : पायजामा (लघुकथा)
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
पूर्ण विराग
पूर्ण विराग
लक्ष्मी सिंह
*भाया राधा को सहज, सुंदर शोभित मोर (कुंडलिया)*
*भाया राधा को सहज, सुंदर शोभित मोर (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
सबसे प्यारा माॅ॑ का ऑ॑चल
सबसे प्यारा माॅ॑ का ऑ॑चल
VINOD CHAUHAN
गुरु हो साथ तो मंजिल अधूरा हो नही सकता
गुरु हो साथ तो मंजिल अधूरा हो नही सकता
Diwakar Mahto
तुमसा तो कान्हा कोई
तुमसा तो कान्हा कोई
Harminder Kaur
2803. *पूर्णिका*
2803. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
चलते-फिरते लिखी गई है,ग़ज़ल
चलते-फिरते लिखी गई है,ग़ज़ल
Shweta Soni
Good morning 🌅🌄
Good morning 🌅🌄
Sanjay ' शून्य'
Though of the day 😇
Though of the day 😇
ASHISH KUMAR SINGH
जो खत हीर को रांझा जैसे न होंगे।
जो खत हीर को रांझा जैसे न होंगे।
सत्य कुमार प्रेमी
Loading...