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16 Oct 2022 · 1 min read

“बिहार में शैक्षिक नवाचार”

“बिहार में शैक्षिक नवाचार”
•••••••••••••••••••••••••••

देखो , यह निज प्राचीन बिहार है;
यहां प्रतिभा ही, सदा हथियार है।

कई महापुरुष यहीं के,अवतार है;
विध्वंश चैतन्य केंद्र की भरमार है।

सदा यहां, शिक्षा केंद्र पर प्रहार है;
न बचा , प्राचीन शैक्षिक संसार है।

अब दिखे न कोई, बौद्ध विहार है;
दोषी सिर्फ,खिलजी बख्तियार है।

समय बदलता सदा ही बारंबार है;
फिर बना,यह आधुनिक बिहार है।

अब सब चाहे,शैक्षिक नवाचार है;
गुरु कष्ट में , बाधक बने कुमार है।

शिक्षक रक्षक, पर खुद लाचार है;
शैक्षिक नीति बनते , पर बेकार है।

शिक्षा के साथ, यहां अत्याचार है;
यही तो, निज आधुनिक बिहार है।

यहां शिक्षक को नित्य नई टेंशन है,
किसी को, नही अब कोई पेंशन है।

नियोजित, हर शिक्षक का नाम है;
सबको मिलते,नकली वेतनमान है।

नही यहां,अब कोई भी इमोशन है;
किसी शिक्षक को,नहीं प्रमोशन है।

बच्चों का, सिर्फ शैक्षिक शोषण है;
‘छात्रवृत्ति’, राजनीतिक पोषण है।

सरकार बनी है यहां, सुशासन की;
पर, चिंता सताये निज आसन की।

मूर्खों को भी , कुर्सी की दरकार है;
सभी, पीएम-सीएम का अवतार है।

शिक्षक भूखा, और शिक्षा बेकार है;
बच्चे उदंड, शिक्षक में शिष्टाचार है।

फिर भी शिक्षक का,उच्च विचार है;
यही आज का, शैक्षिक नवाचार है।
____________________________

स्वरचित सह मौलिक;
……✍️पंकज कर्ण
…..कटिहार(बिहार)

Language: Hindi
2 Likes · 1 Comment · 761 Views
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