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24 Jul 2016 · 1 min read

बात मतलब की करे संसार है

बात मतलब की करे संसार है
बस दिखावे के लिये ये प्यार है

काटती हैं रात दिन तन्हाईयां
ज़िंदगी जीना बड़ा दुश्वार है

दो निवालों के लिये अब देखिये
आदमी बिकता सरे बाजार है

आस्तीनों से भरोसा उठ गया
कोठियों की साँप को दरकार है

बेगुनाहों का घड़ा भरता नहीं
क़ैद में कानून है सरकार है

ढूँढिये अब तो दवा कोई मुफ़ीद
मुल्क़ अपना आजकल बीमार है

राकेश दुबे “गुलशन”
23/07/2016
बरेली

658 Views
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