Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
3 Apr 2024 · 1 min read

बहुत दिनों के बाद मिले हैं हम दोनों

बहुत दिनों के बाद मिले हैं हम दोनों
बनकर जैसे फूल खिले हैं हम दोनों
अभी अँधेरा होने में कुछ बाकी है
साँझ के जैसे नहीं ढले हैं हम दोनों

55 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Shweta Soni
View all
You may also like:
-- फिर हो गयी हत्या --
-- फिर हो गयी हत्या --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
पापा
पापा
Lovi Mishra
बारिश के लिए
बारिश के लिए
Srishty Bansal
हिन्द की भाषा
हिन्द की भाषा
Sandeep Pande
धर्मी जब खुल कर नंगे होते हैं।
धर्मी जब खुल कर नंगे होते हैं।
Dr MusafiR BaithA
जैसे एकसे दिखने वाले नमक और चीनी का स्वाद अलग अलग होता है...
जैसे एकसे दिखने वाले नमक और चीनी का स्वाद अलग अलग होता है...
Radhakishan R. Mundhra
"अग्निस्नान"
Dr. Kishan tandon kranti
কি?
কি?
Otteri Selvakumar
हाय हाय रे कमीशन
हाय हाय रे कमीशन
gurudeenverma198
मेरे मरने के बाद
मेरे मरने के बाद
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
ओ मैना चली जा चली जा
ओ मैना चली जा चली जा
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
Monday Morning!
Monday Morning!
R. H. SRIDEVI
*दादाजी (बाल कविता)*
*दादाजी (बाल कविता)*
Ravi Prakash
बेशर्मी
बेशर्मी
Sanjay ' शून्य'
मैं तो महज आवाज हूँ
मैं तो महज आवाज हूँ
VINOD CHAUHAN
अधर्म का उत्पात
अधर्म का उत्पात
Dr. Harvinder Singh Bakshi
22, *इन्सान बदल रहा*
22, *इन्सान बदल रहा*
Dr Shweta sood
दिल होता .ना दिल रोता
दिल होता .ना दिल रोता
Vishal Prajapati
आंगन महक उठा
आंगन महक उठा
Harminder Kaur
जो ये समझते हैं कि, बेटियां बोझ है कन्धे का
जो ये समझते हैं कि, बेटियां बोझ है कन्धे का
Sandeep Kumar
"मन की संवेदनाएं: जीवन यात्रा का परिदृश्य"
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
महफिले लूट गया शोर शराबे के बगैर। कर गया सबको ही माइल वह तमाशे के बगैर। ❤️
महफिले लूट गया शोर शराबे के बगैर। कर गया सबको ही माइल वह तमाशे के बगैर। ❤️
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
जिसने अपने जीवन में दर्द नहीं झेले उसने अपने जीवन में सुख भी
जिसने अपने जीवन में दर्द नहीं झेले उसने अपने जीवन में सुख भी
Rj Anand Prajapati
कभी कभी प्रतीक्षा
कभी कभी प्रतीक्षा
पूर्वार्थ
9--🌸छोड़ आये वे गलियां 🌸
9--🌸छोड़ आये वे गलियां 🌸
Mahima shukla
हे पिता ! जबसे तुम चले गए ...( पिता दिवस पर विशेष)
हे पिता ! जबसे तुम चले गए ...( पिता दिवस पर विशेष)
ओनिका सेतिया 'अनु '
#लघुकविता-
#लघुकविता-
*प्रणय प्रभात*
तेरी याद
तेरी याद
SURYA PRAKASH SHARMA
31/05/2024
31/05/2024
Satyaveer vaishnav
एकादशी
एकादशी
Shashi kala vyas
Loading...