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31 Jan 2024 · 1 min read

बस चार ही है कंधे

बस चार ही है कंधे
बस चार है कंधे बस चार ही है लोग
कुछ छुट गया कुछ छोड़ दिया
कुछ भूल गया कुछ भुलाया गया
किसी से भी न हमको मिलाया गया
बस चार है कंधे बस चार है लोग
कुछ आगे है कुछ पीछे है
कुछ पैदल है कुछ गाड़ी से है
कुछ दुसरो के साथ राम राम बोल रहे है
बस चार ही कंधे है बस चार ही लोग
कुछ दिन का है जीवन कुछ दिन का है साथ
मुझे किसी से भी न गिला है
बस चार है कंधे बस चार ही लोग
सबसे हंस लिया सबको हँस लिया
कुछ को रुलाया और खुद रो लिया
कुछ ले कर नही आया था कुछ ले कर नही जाऊंगा
बस चार ही कंधे बस चार ही लोग
जिस चार कंधो पर जा रहा हु उन्हे कैसे
शुक्रिया अदा करू
फिर छोड़ कर आयेंगे समसान मे मुझको
मेरा फिर घर वही होगा
जहाँ से आया था सब भूल लौट चला अपने वतन को
मेरा घर तो यही था माया मोह छोड़ सब लौट चला अपने वतन
बस चार है कंधे बस चार ही लोग
ऋतुराज वर्मा

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