Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Dec 2022 · 1 min read

बदल दी

तू फूल थी, तो मैं उसका सुगंध था!
तू नदी थी, तो मैं उसका धारा था!
तू माचिस थी, तो मैं उसका मशाल था!
तू जीवन थी, तो मैं उसका राह था!
यह सभी जानते हुए कि एक दूजे के बिना कोई आगे नहीं बढ़ सकता.
फिर तुझे कौन सी महक लगी,
कि तू फूल की सुगंध बदल दी!
नदी की धारा बदल दी!
माचिस की मशाल बदल दी!
और जीवन जीने की राह बदल दी!
——————०००——————
कवि : जय लगन कुमार हैप्पी

1 Like · 190 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
मेरे पांच रोला छंद
मेरे पांच रोला छंद
Sushila joshi
सूरज का टुकड़ा...
सूरज का टुकड़ा...
Santosh Soni
मेरा लड्डू गोपाल
मेरा लड्डू गोपाल
MEENU SHARMA
नेह धागों का त्योहार
नेह धागों का त्योहार
Seema gupta,Alwar
सुविचार
सुविचार
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
अंतस के उद्वेग हैं ,
अंतस के उद्वेग हैं ,
sushil sarna
ज़िंदगी मेरी दर्द की सुनामी बनकर उभरी है
ज़िंदगी मेरी दर्द की सुनामी बनकर उभरी है
Bhupendra Rawat
■ आज का आभार
■ आज का आभार
*प्रणय प्रभात*
प्रेम एक सहज भाव है जो हर मनुष्य में कम या अधिक मात्रा में स
प्रेम एक सहज भाव है जो हर मनुष्य में कम या अधिक मात्रा में स
Dr MusafiR BaithA
*अनगिन हुए देश में नेता, अलग मगर थे नेताजी (गीत)*
*अनगिन हुए देश में नेता, अलग मगर थे नेताजी (गीत)*
Ravi Prakash
किसी को अगर प्रेरणा मिलती है
किसी को अगर प्रेरणा मिलती है
Harminder Kaur
एक दूसरे से कुछ न लिया जाए तो कैसा
एक दूसरे से कुछ न लिया जाए तो कैसा
Shweta Soni
रेल चलय छुक-छुक
रेल चलय छुक-छुक
Dr. Kishan tandon kranti
हुए अजनबी हैं अपने ,अपने ही शहर में।
हुए अजनबी हैं अपने ,अपने ही शहर में।
कुंवर तुफान सिंह निकुम्भ
ग़ज़ल-हलाहल से भरे हैं ज़ाम मेरे
ग़ज़ल-हलाहल से भरे हैं ज़ाम मेरे
अरविन्द राजपूत 'कल्प'
माँ सच्ची संवेदना....
माँ सच्ची संवेदना....
डॉ.सीमा अग्रवाल
समझना है ज़रूरी
समझना है ज़रूरी
Dr fauzia Naseem shad
धार्मिक होने का मतलब यह कतई नहीं कि हम किसी मनुष्य के आगे नत
धार्मिक होने का मतलब यह कतई नहीं कि हम किसी मनुष्य के आगे नत
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
अक्ल का अंधा - सूरत सीरत
अक्ल का अंधा - सूरत सीरत
DR ARUN KUMAR SHASTRI
ममतामयी मां
ममतामयी मां
SATPAL CHAUHAN
मां - हरवंश हृदय
मां - हरवंश हृदय
हरवंश हृदय
बैठे-बैठे यूहीं ख्याल आ गया,
बैठे-बैठे यूहीं ख्याल आ गया,
Sonam Pundir
हकीकत उनमें नहीं कुछ
हकीकत उनमें नहीं कुछ
gurudeenverma198
फूलों की महक से मदहोश जमाना है...
फूलों की महक से मदहोश जमाना है...
कवि दीपक बवेजा
शिक्षित लोग
शिक्षित लोग
Raju Gajbhiye
आंखें मूंदे हैं
आंखें मूंदे हैं
इंजी. संजय श्रीवास्तव
*है गृहस्थ जीवन कठिन
*है गृहस्थ जीवन कठिन
Sanjay ' शून्य'
सुनो सखी !
सुनो सखी !
Manju sagar
वर्षा रानी⛈️
वर्षा रानी⛈️
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
मां सीता की अग्नि परीक्षा ( महिला दिवस)
मां सीता की अग्नि परीक्षा ( महिला दिवस)
Rj Anand Prajapati
Loading...