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1 Jun 2023 · 1 min read

बदलने को तो इन आंखों ने मंजर ही बदल डाले

बदलने को तो इन आंखों ने मंजर ही बदल डाले
हुए थे कत्ल जिनसे हम वो खंजर ही बदल डाले
बड़े बेबस खड़े पर्वत यही दिन रात सोचे हैं
भला कैसे क्यूं नदियों ने समंदर ही बदल डाले
✍️ हरवंश हृदय

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