Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Dec 2023 · 1 min read

बड़े परिवर्तन तुरंत नहीं हो सकते, लेकिन प्रयास से कठिन भी आस

बड़े परिवर्तन तुरंत नहीं हो सकते, लेकिन प्रयास से कठिन भी आसान हो जाता है, जब हम अकेले हों तब अपने विचारों को संभालें और जब हम सबके बीच हों तब अपने शब्दों को संभालें, हमें उन गतिविधियों, व्यवहारों और निर्णयों को अवश्य दोहराना चाहिए जो जीवन में सफलता लाए थे…🙏🏃🏻‍♂️संस्कार देते रहे। बच्चों को सही और गलत का बोध कराते रहे उनके साथ भावनात्मक रूप से जुड़े, समाज के हर पहलुओं को स्पष्ट रूप से समझाये। वो जीवन में जो भी कार्य करेंगे आपको ध्यान में रखकर ही करेंगे। कामयाबी को ऊँचे पद से ना आंके। आपके द्वारा दिये सही संस्कार और परवरिश उन्हें सभी परिस्थितियों से लड़ना सीखते हैं। सुप्रभात, नमस्कार, वंदेमातरम् … भारत माता की जय 🚭‼️

190 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from ललकार भारद्वाज
View all
You may also like:
कहीं खूबियां में भी खामियां निकाली जाती है, वहीं कहीं  कमियो
कहीं खूबियां में भी खामियां निकाली जाती है, वहीं कहीं कमियो
Ragini Kumari
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
Shekhar Chandra Mitra
गांव की याद
गांव की याद
Punam Pande
आओ थोड़ा जी लेते हैं
आओ थोड़ा जी लेते हैं
Dr. Pradeep Kumar Sharma
आपकी तस्वीर ( 7 of 25 )
आपकी तस्वीर ( 7 of 25 )
Kshma Urmila
हम कुर्वतों में कब तक दिल बहलाते
हम कुर्वतों में कब तक दिल बहलाते
AmanTv Editor In Chief
■ लेखन मेरे लिए...
■ लेखन मेरे लिए...
*Author प्रणय प्रभात*
संजय सनातन की कविता संग्रह गुल्लक
संजय सनातन की कविता संग्रह गुल्लक
Paras Nath Jha
Kbhi asman me sajti bundo ko , barish kar jate ho
Kbhi asman me sajti bundo ko , barish kar jate ho
Sakshi Tripathi
परेड में पीछे मुड़ बोलते ही,
परेड में पीछे मुड़ बोलते ही,
नेताम आर सी
* न मुझको चाह महलों की, मुझे बस एक घर देना 【मुक्तक 】*
* न मुझको चाह महलों की, मुझे बस एक घर देना 【मुक्तक 】*
Ravi Prakash
मंजिल नई नहीं है
मंजिल नई नहीं है
Pankaj Sen
तन के लोभी सब यहाँ, मन का मिला न मीत ।
तन के लोभी सब यहाँ, मन का मिला न मीत ।
sushil sarna
प्रेम उतना ही करो
प्रेम उतना ही करो
पूर्वार्थ
मोहमाया के जंजाल में फंसकर रह गया है इंसान
मोहमाया के जंजाल में फंसकर रह गया है इंसान
Rekha khichi
मिट्टी की खुश्बू
मिट्टी की खुश्बू
Dr fauzia Naseem shad
स्वयं से तकदीर बदलेगी समय पर
स्वयं से तकदीर बदलेगी समय पर
महेश चन्द्र त्रिपाठी
साझ
साझ
Bodhisatva kastooriya
फितरत न कभी सीखा
फितरत न कभी सीखा
Satish Srijan
दिल के अरमान मायूस पड़े हैं
दिल के अरमान मायूस पड़े हैं
Harminder Kaur
*अनकही बातें याद करके कुछ बदलाव नहीं आया है लेकिन अभी तक किस
*अनकही बातें याद करके कुछ बदलाव नहीं आया है लेकिन अभी तक किस
Shashi kala vyas
कांतिपति का चुनाव-रथ
कांतिपति का चुनाव-रथ
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
2316.पूर्णिका
2316.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
चाबी घर की हो या दिल की
चाबी घर की हो या दिल की
शेखर सिंह
तेरे बिना
तेरे बिना
DR ARUN KUMAR SHASTRI
दलित लेखक बिपिन बिहारी से परिचय कीजिए / MUSAFIR BAITHA
दलित लेखक बिपिन बिहारी से परिचय कीजिए / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
सूरज दादा ड्यूटी पर (हास्य कविता)
सूरज दादा ड्यूटी पर (हास्य कविता)
डॉ. शिव लहरी
ध्यान में इक संत डूबा मुस्कुराए
ध्यान में इक संत डूबा मुस्कुराए
Shivkumar Bilagrami
या तो सच उसको बता दो
या तो सच उसको बता दो
gurudeenverma198
इन आँखों को भी अब हकीम की जरूरत है..
इन आँखों को भी अब हकीम की जरूरत है..
Tarun Garg
Loading...