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May 26, 2016 · 1 min read

बचपन

खेल में आज भी लगा है मन !
है अभी भी यही कही बचपन !
भूलते ही नहीं पुराने दिन !
है कही दिल में आज सूनापन !!

आलोक मित्तल उदित

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