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26 Jul 2016 · 1 min read

फिर भी सूरज निकलता है

हल्का सा धुंध
धरती की छाती पर सवार
सूरज को रोकने की पूरी तैयारी
फिर भी सूरज निकलता है ,
गोल ,लाल ,सुंदर ,दिव्य
धुंध को चिरता हुआ
देता है अपना प्रकाश
कर देता है निहाल सबको
अपनी अनवरत ऊर्जा से ,
पता नहीं चलता है रात कब गुजरी
इसका एहसास भी सूरज कराता है
और दौड़ने लगता है
युवाओं में क्रान्ति का गर्म खून
और शुरू हो जाता है एक अनवरत संघर्ष
मूल्यों के लिए ,जिनका आज ह्रास हो रहा है
और यह संघर्ष जारी रहेगा
चिंगारियां मिलकर आग बनेंगी
राख कर देंगी उन मंसूबों को
जो कर रहे मूल्यों के साथ छेड़ छाड़
जीने के अधिकार के साथ
इसे याद रखना
वर्तमान के महल का सपना
भविष्य गढ़ेगा
इतिहास करेगा नींव प्रदान
तब पहिया आगे बढेगा .

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Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 1 Comment · 236 Views
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