Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 Oct 2023 · 1 min read

फिर क्यूँ मुझे?

#दिनांक:-11/10/2023
#शीर्षक:-फिर क्यूॅ मुझे?

मेरे जन्म पर सबसे ज्यादा खुश,
तुम ही हुए थे ना पापा?
जो खिलौने मुझे चाहिए,
लाकर दिये थे ना पापा ?
स्कूल से कालेज तक ,
हमेशा साथ-साथ पढ़े हो पापा?
जब मैं सयानी हो गयी,
इसी चिंता में बिचलित हुए थे ना पापा?
मेरी सुरक्षा का भार खुद के कंधे पर,
उठाये थे ना पापा?
पर अब क्या मैं इतनी बड़ी हो गई ?
कि सद्गृहस्थी की जिम्मेदारी,
मुझे दे रहे हो पापा ।
मेरा ख्याल खुद से रखना सिखाया,
अब ख्याल कौन रखेगा पापा ?
पच्चीस सालों का घर छोड़कर,
जाने को क्यूँ कह रहे हो पापा?
दान तो और कुछ भी कर सकते हो,
अपने कलेजे का दान,
क्यूँ कर रहे हो पापा?
ना तुम खुश ना मैं खुश,
फिर क्यूँ मुझे ,
खुद से दूर कर दिये पापा ?

रचना मौलिक,अप्रकाशित,स्वरचित और सर्वाधिकार सुरक्षित है।

य्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

Language: Hindi
176 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
कुछ लिखा हू तुम्हारी यादो में
कुछ लिखा हू तुम्हारी यादो में
देवराज यादव
जन मन में हो उत्कट चाह
जन मन में हो उत्कट चाह
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
कुदरत
कुदरत
Neeraj Agarwal
Adhere kone ko roshan karke
Adhere kone ko roshan karke
Sakshi Tripathi
"गूंगों की बस्ती में, बहरों की आबादी।
*Author प्रणय प्रभात*
I love you
I love you
Otteri Selvakumar
*बोलो अंग्रेजी सदा, गाँठो रौब अपार (हास्य कुंडलिया)*
*बोलो अंग्रेजी सदा, गाँठो रौब अपार (हास्य कुंडलिया)*
Ravi Prakash
Quote - If we ignore others means we ignore society. This way we ign
Quote - If we ignore others means we ignore society. This way we ign
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
अपनी क़िस्मत को हम
अपनी क़िस्मत को हम
Dr fauzia Naseem shad
जिम्मेदारी कौन तय करेगा
जिम्मेदारी कौन तय करेगा
Mahender Singh
वृंदावन की कुंज गलियां 💐
वृंदावन की कुंज गलियां 💐
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
दीवारें खड़ी करना तो इस जहां में आसान है
दीवारें खड़ी करना तो इस जहां में आसान है
Charu Mitra
* कुण्डलिया *
* कुण्डलिया *
surenderpal vaidya
जब मैसेज और काॅल से जी भर जाता है ,
जब मैसेज और काॅल से जी भर जाता है ,
Manoj Mahato
खामोश अवशेष ....
खामोश अवशेष ....
sushil sarna
जीवन दिव्य बन जाता
जीवन दिव्य बन जाता
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
फितरत
फितरत
Dr.Khedu Bharti
वह एक हीं फूल है
वह एक हीं फूल है
Shweta Soni
"अगली राखी आऊंगा"
Lohit Tamta
कहमुकरी
कहमुकरी
डॉ.सीमा अग्रवाल
"समय से बड़ा जादूगर दूसरा कोई नहीं,
Tarun Singh Pawar
काश अभी बच्चा होता
काश अभी बच्चा होता
साहिल
हिन्दी ग़ज़लः सवाल सार्थकता का? +रमेशराज
हिन्दी ग़ज़लः सवाल सार्थकता का? +रमेशराज
कवि रमेशराज
"अजीब फलसफा"
Dr. Kishan tandon kranti
💐अज्ञात के प्रति-88💐
💐अज्ञात के प्रति-88💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
हाइकु
हाइकु
अशोक कुमार ढोरिया
“तब्दीलियां” ग़ज़ल
“तब्दीलियां” ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
ख़्बाब आंखों में बंद कर लेते - संदीप ठाकुर
ख़्बाब आंखों में बंद कर लेते - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
बड़ा गहरा रिश्ता है जनाब
बड़ा गहरा रिश्ता है जनाब
शेखर सिंह
मुस्कुराने लगे है
मुस्कुराने लगे है
Paras Mishra
Loading...