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10 Jul 2023 · 1 min read

फितरत ना बदल सका

मेरा दिल आप से सजाया

जीवंत नहीं, स्मृति सही

रखा मैंने संदूक में भरके

हां, फितरत ना बदल सका ।

फ़िज़ाओं ने सरगम ​​गा दिया

वसुन्धरा ने भर दी नई ऊर्जा

मन मयूर नित्य तुम्हें बुलाया

हां, फितरत ना बदल सका ।

रिम- झीम से बारिश में

जब -जब भीगा मेरा अंग

तेरा छाया भीगा मेरे संग

हां, फितरत ना बदल सका ।

ज्वार- भाटा की खनक में

खुद किया मैने समर्पण

पूरा ना सही… अधूरा सही

हां,फितरत ना बदल सका ।

आत्मा अलग, प्राण अलग

ये नही कभी हो पाया ।

मेरे प्राण वायु बिक चुका प्रिय

आप सदैव खरीदार प्रियतम

हां,फितरत ना बदल सका ll

गौतम साव
वेस्ट बंगाल
९३७८३२२१९६

5 Likes · 2 Comments · 162 Views
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