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17 Jun 2023 · 1 min read

फ़ानी

ज़िंदगी तो आनी-जानी है ,
यहां कोई ला-फ़ानी नहीं है ,
लम्हों की दहलीज़ पर ठहरे हुए
हम तिनके हैं ,
वक्त का झोंका कब उड़ा ले जाए
दिन गिनती के हैं ,
जो कुछ है सब यहीं छोड़ जाना है ,
खाली हाथ जाकर वापस ना आना है ।

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