Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 May 2024 · 1 min read

हार मैं मानू नहीं

हार मैं मानू नहीं

मार्ग कितना भी कठिन हो,
हार मैं मानू नहीं,
भारी भरकम भीड़ में भी,
हार मैं मानू नही।।

नित नई उम्मीदों के साथ,
बढ़ती जा रही निज पथ पर मैं,
चाहे कितना तूफा आए ,
हार मैं मानू नहीं।।

पावों में कंकड़ पत्थर चुभेंगे,
पवन भी विपरीत हो बहेंगे,
फिर भी मुझे बढ़ना ही होगा,
हार मैं मानू नहीं।।

संघर्षों ने आकर घेरा मुझे,
निराशाओं ने भी झकझोरा मुझे।
तोड़ इनकी बेड़ियां जाना मुझे,
हार मैं मानू नही।।

जीवन का पथ अवलोकित कर,
कर्तव्यों को निज पूरा कर,
आनंदमग्न हो जाऊं मैं ,
हार मैं मानू नहीं।।

अनामिका तिवारी ‘ अन्नपूर्णा ‘

Language: Hindi
50 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
आग और पानी 🔥🌳
आग और पानी 🔥🌳
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
गमले में पेंड़
गमले में पेंड़
Mohan Pandey
मन भर बोझ हो मन पर
मन भर बोझ हो मन पर
Atul "Krishn"
"जुलमी सूरज"
Dr. Kishan tandon kranti
(आखिर कौन हूं मैं )
(आखिर कौन हूं मैं )
Sonia Yadav
दोहा
दोहा
गुमनाम 'बाबा'
बेटी शिक्षा
बेटी शिक्षा
Dr.Archannaa Mishraa
ये जो तेरे बिना भी, तुझसे इश्क़ करने की आदत है।
ये जो तेरे बिना भी, तुझसे इश्क़ करने की आदत है।
Manisha Manjari
🌸 आशा का दीप 🌸
🌸 आशा का दीप 🌸
Mahima shukla
ముందుకు సాగిపో..
ముందుకు సాగిపో..
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
हनुमान जी वंदना ।। अंजनी सुत प्रभु, आप तो विशिष्ट हो ।।
हनुमान जी वंदना ।। अंजनी सुत प्रभु, आप तो विशिष्ट हो ।।
Kuldeep mishra (KD)
*** मेरे सायकल की सवार....! ***
*** मेरे सायकल की सवार....! ***
VEDANTA PATEL
माॅ॑ बहुत प्यारी बहुत मासूम होती है
माॅ॑ बहुत प्यारी बहुत मासूम होती है
VINOD CHAUHAN
"आक्रात्मकता" का विकृत रूप ही "उन्माद" कहलाता है। समझे श्रीम
*प्रणय प्रभात*
किसी ज्योति ने मुझको यूं जीवन दिया
किसी ज्योति ने मुझको यूं जीवन दिया
gurudeenverma198
दो कदम लक्ष्य की ओर लेकर चलें।
दो कदम लक्ष्य की ओर लेकर चलें।
surenderpal vaidya
*सरल हृदय श्री सत्य प्रकाश शर्मा जी*
*सरल हृदय श्री सत्य प्रकाश शर्मा जी*
Ravi Prakash
मेरी हास्य कविताएं अरविंद भारद्वाज
मेरी हास्य कविताएं अरविंद भारद्वाज
अरविंद भारद्वाज
मृत्यु पर विजय
मृत्यु पर विजय
Mukesh Kumar Sonkar
दौलत
दौलत
Neeraj Agarwal
ज़िन्दगी की तरकश में खुद मरता है आदमी…
ज़िन्दगी की तरकश में खुद मरता है आदमी…
Anand Kumar
मुलाक़ातें ज़रूरी हैं
मुलाक़ातें ज़रूरी हैं
Shivkumar Bilagrami
बचपन
बचपन
लक्ष्मी सिंह
भगवा है पहचान हमारी
भगवा है पहचान हमारी
Dr. Pratibha Mahi
किस तरफ़ शोर है, किस तरफ़ हवा चली है,
किस तरफ़ शोर है, किस तरफ़ हवा चली है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
*कभी उन चीजों के बारे में न सोचें*
*कभी उन चीजों के बारे में न सोचें*
नेताम आर सी
वो इश्क़ कहलाता है !
वो इश्क़ कहलाता है !
Akash Yadav
पुरानी पेंशन
पुरानी पेंशन
डॉ०छोटेलाल सिंह 'मनमीत'
3075.*पूर्णिका*
3075.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
ग़ज़ल
ग़ज़ल
Neelofar Khan
Loading...