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17 Mar 2024 · 1 min read

प्रेम पगडंडी कंटीली फिर भी जीवन कलरव है।

प्रेम पगडंडी कंटीली फिर भी जीवन कलरव है।
विरही -विरहन उर पीड़ा निस-दिन ही नव है।।
जीत कर भी हार जाते चित् अपना प्रेमी,
हार कर दिल मुस्कुराना प्रेमी उत्सव है।।
नीलम शर्मा ✍️

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