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1 Feb 2024 · 1 min read

‘प्रहरी’ बढ़ता दंभ है, जितना बढ़ता नोट

‘प्रहरी’ बढ़ता दंभ है, जितना बढ़ता नोट
निर्धन को है मानता, जग यह सिक्का खोट।
a m prahari

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