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23 May 2024 · 1 min read

प्रभु -कृपा

प्रभु-कृपा

प्रभु-चरणों की है आस ।
उनसे ही चलती है श्वास ।
कण-कण में उनका है वास ।
यही हमारा है विश्वास ।

माया का जो है पाश ।
उससे भ्रमित है प्राणि मात्र।
लोभ, मोह, मदादि जो हैं षड़‌विकार।
इनसे ही मानव-मन है लाचार ।

गुरु-कृपा ही वह है मार्ग।
जिससे मिलता है मुक्ति-द्वार ।
प्रभु-कृपा से ही होता कल्याण।
मानव-जन्म का होता है उद्धार ।
– डॉ० उपासना पाण्डेय

Language: Hindi
1 Like · 37 Views
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