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17 Nov 2023 · 1 min read

प्रतीक्षा

प्रतीक्षा

प्रतीक्षा है किसी और की
मेरा तो कोंई और।
नहीं ठिकाना जीवन का
कहां मिलेगा ठौर।।

प्रतिक्षा है मुझे मौत की
वहीं मिलेगा ठौर।
कटु वचन, अटल सत्य है
शब्द कीजिए गौर।।

अंत समय काम न आवै
कोंई न देवें साथ।
मुझे प्रतिक्षा है नाथ की
बंदी छुड़ाए राम।।

पंच तत्व का यह देह है
अंत विलीन हो जात।
प्रतीक्षा घड़ी समाप्त हुई
यमदेव लिए हैं जाते।।

स्वरचित रचना मौलिक
डॉ विजय कुमार कन्नौजे

Language: Hindi
2 Likes · 122 Views
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