Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Dec 2022 · 2 min read

“प्रतिक्रिया, समालोचना आ टिप्पणी “

डॉ लक्ष्मण झा “ परिमल “
=========================
प्रतिक्रिया सकारात्मक ,विषय संबंधित ,तथ्यपूर्ण ,रोचक ,सुंदर सब केँ नीक लगैत अछि ! इ गप्प एहिठाम नहि रुकैत अछि ! कखनो -कखनो समालोचना ,टिप्पणी ,निर्देश आ कटाक्ष क प्रतिक्रिया क सामना सोहो करय पड़ैत छैक जे स्वभावतः असहज प्रतीत होइत अछि !
प्रायः -प्रायः इ असहज भंगिमा हमरालोकनि केँ राजनीति विषय क रंगमंच पर सहजता सँ भेटइत अछि ! हमरा लोकनिक विचारधारा अलग -अलग होइत अछि ! एहि परिपेक्ष मे अधिकाशतः कर्कश वातावरण क श्री गणेश भेनाइ बद्द स्वाभाविक अछि ! एहि बतावरण मे मित्रता क भीति चटकऽ लगैत अछि ! हमरा लोकनि तंग भऽ हुनका “ ब्लॉक “ क दैत छियनि अन्यथा “ अनफ्रेंड “ क दैत छियनि !
कहू त भला , सब काज छोड़ि -छाड़ि कहिया धरि इ विवाद मे फसल रहब ? डिजिटल मित्रता क समय मे मित्रता सब तरि पसरल अछि ! आहाँ नहि त कियो आर लाइन मे लागल छथि ! एकटा गप्प अपन गाँइठि बाँहिं लिय —- “ समान विचारधारा ” वाला लोके एक संगे रहि सकैत छथि जे डिजिटल मित्रता क मूल मंत्र थीक !
साहित्यिक परिचर्चा मे सहो समलोचना होइत अछि आ टीका -टिप्पणी सहो कयल जाइत अछि ! परंच इ समलोचना आ टीका -टिप्पणी शालीनता ,शिष्टाचार आ माधुर्यता पर अधिकांशतः समाहित रहैत अछि ! किछु हम बुझब आ किछु वो बुझताह !
बहुत लोक एहनो छथि जे कियो किनको लेखनी केँ पढ़ताह नहि तखन कहू समालोचना करबा क प्रश्न कतय उठइत अछि ? अधिकाशतः लोक देखइत छथि आ पढि केँ अपन मुखाकृति बदलि लैत छथि ! तथापि एहन दिव्य मित्र केँ हृदय मे सम्हारि केँ रखिते छियनि !
किछु एहनो दिव्य ग्रहक प्राणी छथि जे सदैव अद्भुत रहैत छथि ! हुनकर प्रतिक्रिया सहो दिव्य होइत छैनि ! आहाँ राजनीति विषय लिखु ,साहित्यिक लेख ,कविता ,व्यंग्यात्मक आ विश्व क समस्त गप्प केँ किया नहि लिखु मुदा इ दिव्य ग्रहक अद्भुत प्राणी क समालोचना सँ आहाँ अवश्य मर्माहत हेब ! आहाँ किछु लिखु ,किछु करू वा कोनो चित्र पोस्ट करू ,अपन उपलब्धि क शेयर करू आ आहाँ कोनो दुख से पीड़ित छी, तकर दिव्य लोकक लेल कोनो फर्क नहि !
अद्भुत ग्रह क प्राणी लोकनि क कमेन्ट पर ध्यान सँ देखू आ पढू :–
“ जय हो “—-
“जय श्री राम “—
“जय मिथिला “—-
“जय हनुमान “ —
इत्यादि -इत्यादि !
एहन उद्घोष क महत्व धार्मिक अनुष्ठान क लेल अतिउत्तम अछि परंतु एहि सभक प्रयोग इ अद्भुत ग्रह क प्राणी सब जगह करैत छथि ! हिनका कनिकबो ज्ञात नहि छैनि जे के के एहि वाण सँ आहत होइत छथि ?
सब अपन -अपन स्थान पर जे छथि से छथिये , मुदा एहि गप्प केँ कहियो अस्वीकार नहि क सकैत छी जे हम जे अपन प्रतिक्रिया ,समालोचना आ टीका -टिप्पणी सोशल मीडिया पर करैत छी वो यथायोग्य आ सटीक हेबाक चाहि अन्यथा हमरा लोकनि केँ कियो स्वीकार नहि करताह !
=============
डॉ लक्ष्मण झा ” परिमल ”
साउंड हेल्थ क्लिनिक
एस ० पी ० कॉलेज रोड
दुमका
झारखंड
भारत
06.12.2022

Language: Maithili
131 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
धोखे से मारा गद्दारों,
धोखे से मारा गद्दारों,
Satish Srijan
दिल जल रहा है
दिल जल रहा है
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पराया हुआ मायका
पराया हुआ मायका
विक्रम कुमार
रंग तो प्रेम की परिभाषा है
रंग तो प्रेम की परिभाषा है
Dr. Man Mohan Krishna
इश्क खुदा का घर
इश्क खुदा का घर
Surinder blackpen
"मोल"
Dr. Kishan tandon kranti
संसार है मतलब का
संसार है मतलब का
अरशद रसूल बदायूंनी
दादी की वह बोरसी
दादी की वह बोरसी
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
प्याली से चाय हो की ,
प्याली से चाय हो की ,
sushil sarna
करवा चौथ
करवा चौथ
Er. Sanjay Shrivastava
* संसार में *
* संसार में *
surenderpal vaidya
कि लड़का अब मैं वो नहीं
कि लड़का अब मैं वो नहीं
The_dk_poetry
आयी थी खुशियाँ, जिस दरवाजे से होकर, हाँ बैठी हूँ उसी दहलीज़ पर, रुसवा अपनों से मैं होकर।
आयी थी खुशियाँ, जिस दरवाजे से होकर, हाँ बैठी हूँ उसी दहलीज़ पर, रुसवा अपनों से मैं होकर।
Manisha Manjari
🍈🍈
🍈🍈
*Author प्रणय प्रभात*
स्त्री एक कविता है
स्त्री एक कविता है
SATPAL CHAUHAN
आप आजाद हैं? कहीं आप जानवर तो नहीं हो गए, थोड़े पालतू थोड़े
आप आजाद हैं? कहीं आप जानवर तो नहीं हो गए, थोड़े पालतू थोड़े
Sanjay ' शून्य'
सत्य की खोज
सत्य की खोज
SHAMA PARVEEN
ऐ दिल न चल इश्क की राह पर,
ऐ दिल न चल इश्क की राह पर,
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
💐प्रेम कौतुक-189💐
💐प्रेम कौतुक-189💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
*महाराज श्री अग्रसेन को, सौ-सौ बार प्रणाम है  【गीत】*
*महाराज श्री अग्रसेन को, सौ-सौ बार प्रणाम है 【गीत】*
Ravi Prakash
यहाँ तो मात -पिता
यहाँ तो मात -पिता
DrLakshman Jha Parimal
कब मेरे मालिक आएंगे!
कब मेरे मालिक आएंगे!
Kuldeep mishra (KD)
आलसी व्यक्ति
आलसी व्यक्ति
Paras Nath Jha
बिहार में दलित–पिछड़ा के बीच विरोध-अंतर्विरोध की एक पड़ताल : DR. MUSAFIR BAITHA
बिहार में दलित–पिछड़ा के बीच विरोध-अंतर्विरोध की एक पड़ताल : DR. MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
किस्सा मशहूर है जमाने में मेरा
किस्सा मशहूर है जमाने में मेरा
ठाकुर प्रतापसिंह "राणाजी"
तल्ख
तल्ख
shabina. Naaz
नारी सम्मान
नारी सम्मान
डॉ प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, प्रेम
अपने-अपने संस्कार
अपने-अपने संस्कार
Dr. Pradeep Kumar Sharma
ज़िंदगी मौत पर
ज़िंदगी मौत पर
Dr fauzia Naseem shad
हाजीपुर
हाजीपुर
Hajipur
Loading...