Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
18 Jun 2023 · 1 min read

पितृ दिवस134

घर की छत जैसे पिता, जिनसे मिलती ठाँव
ख़ुद सहते हैं धूप को, देते हमको छाँव
देते हमको छाँव, सख़्त लगते बाहर से
पर संवेदनशील, बहुत कोमल अंदर से
कहे ‘अर्चना’ बात, हाथ इनका यदि सिर पर
रहते हम निश्चिंत, बनाते ये घर को घर

18-06-2023
डॉ अर्चना गुप्ता

4 Likes · 1 Comment · 1620 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr Archana Gupta
View all
You may also like:
हमें न बताइये,
हमें न बताइये,
शेखर सिंह
जीने दो मुझे अपने वसूलों पर
जीने दो मुझे अपने वसूलों पर
goutam shaw
स्त्रियाँ
स्त्रियाँ
Shweta Soni
मौसम का मिजाज़ अलबेला
मौसम का मिजाज़ अलबेला
Buddha Prakash
और भी शौक है लेकिन, इश्क तुम नहीं करो
और भी शौक है लेकिन, इश्क तुम नहीं करो
gurudeenverma198
बादलों को आज आने दीजिए।
बादलों को आज आने दीजिए।
surenderpal vaidya
*पाते असली शांति वह ,जिनके मन संतोष (कुंडलिया)*
*पाते असली शांति वह ,जिनके मन संतोष (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
1B_ वक्त की ही बात है
1B_ वक्त की ही बात है
Kshma Urmila
देश के वीरों की जब बात चली..
देश के वीरों की जब बात चली..
Harminder Kaur
भाईचारे का प्रतीक पर्व: लोहड़ी
भाईचारे का प्रतीक पर्व: लोहड़ी
कवि रमेशराज
आख़िरी मुलाकात !
आख़िरी मुलाकात !
The_dk_poetry
Thunderbolt
Thunderbolt
Pooja Singh
कर ले प्यार
कर ले प्यार
Ashwani Kumar Jaiswal
*हुस्न से विदाई*
*हुस्न से विदाई*
Dushyant Kumar
शासन की ट्रेन पलटी
शासन की ट्रेन पलटी
*Author प्रणय प्रभात*
हम जानते हैं - दीपक नीलपदम्
हम जानते हैं - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
चलो मिलते हैं पहाड़ों में,एक खूबसूरत शाम से
चलो मिलते हैं पहाड़ों में,एक खूबसूरत शाम से
पूर्वार्थ
*जिंदगी  जीने  का नाम है*
*जिंदगी जीने का नाम है*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
सिलसिले
सिलसिले
Dr. Kishan tandon kranti
वारिस हुई
वारिस हुई
Dinesh Kumar Gangwar
सौतियाडाह
सौतियाडाह
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
जब अपनी बात होती है,तब हम हमेशा सही होते हैं। गलत रहने के बा
जब अपनी बात होती है,तब हम हमेशा सही होते हैं। गलत रहने के बा
Paras Nath Jha
स्वयं को तुम सम्मान दो
स्वयं को तुम सम्मान दो
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
मोहब्बत की दुकान और तेल की पकवान हमेशा ही हानिकारक होती है l
मोहब्बत की दुकान और तेल की पकवान हमेशा ही हानिकारक होती है l
Ashish shukla
भाषा और बोली में वहीं अंतर है जितना कि समन्दर और तालाब में ह
भाषा और बोली में वहीं अंतर है जितना कि समन्दर और तालाब में ह
Rj Anand Prajapati
तमाम आरजूओं के बीच बस एक तुम्हारी तमन्ना,
तमाम आरजूओं के बीच बस एक तुम्हारी तमन्ना,
Shalini Mishra Tiwari
राम- नाम माहात्म्य
राम- नाम माहात्म्य
Dr. Upasana Pandey
एक और द्रौपदी (अंतःकरण झकझोरती कहानी)
एक और द्रौपदी (अंतःकरण झकझोरती कहानी)
गुमनाम 'बाबा'
कृष्ण कुमार अनंत
कृष्ण कुमार अनंत
Krishna Kumar ANANT
2934.*पूर्णिका*
2934.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
Loading...