Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Apr 24, 2022 · 1 min read

पिता की व्यथा

पिता की व्यथा
~~°~~°~~°
जब पड़ी हो मार जग में,अपने ही हित को साधने ,
क्या कोई नचिकेता खड़ा होगा,फिर से यम के सामने।

जब पिता पुत्र की राहें अलग,तन्हा अकेला रूह भी , अन्जान सा दिखता है,यदि बैठा हुआ भी हो सामने।
शब्द खलते हैं हृदय में , सत्य वचन बुजुर्गों के सभी,
जिसे सुनने को लालायित कभी,होते बहुत कुछ मायने।

जब पड़ी हो मार जग में,अपने ही हित को साधने ,
क्या कोई नचिकेता खड़ा होगा,फिर से यम के सामने।

भोर का तारा दिखे नभ, कलरव को जाते खग सभी,
कर्त्तव्यपथ सुत उठ खड़े हो,रह गए हैं आज इने गिने।
साधन हुआ उन्नत धरा पर,साधक नहीं दिखते तभी ,
विज्ञान युग में ज्ञान शिथिल है,पिता सुन रहे बस धड़कने।

जब पड़ी हो मार जग में,अपने ही हित को साधने ,
क्या कोई नचिकेता खड़ा होगा,फिर से यम के सामने।

नेत्र लज्जित स्वर भी कम्पित,से धरा अब झुक रही,
हो रही है अब मिलावट, रिश्तें अनोखे जो,थे थामने।
खोट दिलों में है नहीं पर,संस्कार बदलती क्यूँ जा रही,
भाव पूरित अश्रु बहाने, लो अब मैं आ गया हूँ सामने ।

जब पड़ी हो मार जग में,अपने ही हित को साधने ,
क्या कोई नचिकेता खड़ा होगा,फिर से यम के सामने।

मौलिक एवं स्वरचित
© ® मनोज कुमार कर्ण
कटिहार ( बिहार )
तिथि – २४ /०४ /२०२२

12 Likes · 20 Comments · 534 Views
You may also like:
इब्ने सफ़ी
DR ARUN KUMAR SHASTRI
इंसानियत
AMRESH KUMAR VERMA
एक संकल्प
Aditya Prakash
अधर मौन थे, मौन मुखर था...
डॉ.सीमा अग्रवाल
मां की दुआ है।
Taj Mohammad
" हाथी गांव "
Dr Meenu Poonia
मेरा अक्स तो आब है।
Taj Mohammad
नवगीत
Mahendra Narayan
'बेदर्दी'
Godambari Negi
ज़ाफ़रानी
Anoop Sonsi
चलो स्वयं से इस नशे को भगाते हैं।
Taj Mohammad
*पद्म विभूषण स्वर्गीय गुलाम मुस्तफा खान साहब से दो मुलाकातें*
Ravi Prakash
** दर्द की दास्तान **
Dr. Alpa H. Amin
यादों की साजिशें
Manisha Manjari
💐प्रेम की राह पर-56💐💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
अक्षय तृतीया की हार्दिक शुभकामनाएं
sheelasingh19544 Sheela Singh
वो बरगद का पेड़
Shiwanshu Upadhyay
धीरे-धीरे कदम बढ़ाना
Anamika Singh
ईद
Khushboo Khatoon
कलयुग का आरम्भ है।
Taj Mohammad
【20】 ** भाई - भाई का प्यार खो गया **
Arise DGRJ (Khaimsingh Saini)
मां
Umender kumar
पुस्तक समीक्षा -एक थी महुआ
Rashmi Sanjay
हमने प्यार को छोड़ दिया है
VINOD KUMAR CHAUHAN
जीवन-दाता
Prabhudayal Raniwal
खुश रहना
dks.lhp
सालो लग जाती है रूठे को मानने में
Anuj yadav
हमदर्द कैसे-कैसे
Shivkumar Bilagrami
तू हैं शब्दों का खिलाड़ी....
Dr. Alpa H. Amin
✍️आज फिर जेब खाली है✍️
"अशांत" शेखर
Loading...