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30 Jan 2017 · 1 min read

परिवर्तन

” परिवर्तन ”
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परिवर्तन
प्रकृति का नियम है !
यह नित्य है !
शाश्वत है !
अद्भुत है !
क्षणिक है !
नवीनता है !
मानवीय सोच
और
कृत्यों का संयम है !
बदलाव से………..
बदलता है , पुरातन !
नूतनता में |
भौतिक और अभौतिक !
मानस और अतिमानस !
मानव और मानवता !
कर्म और मर्म………….
सब बदलता है !
यही प्रकृति का नियम है !
सब कुछ सही है………..
जब तक हो !
सकारात्मक परिवर्तन |
पर !
घातक है परिवर्तन !
जब बदलता है……….
विश्वास……
अविश्वास में !
प्रेम……..
नफरत में !
निस्वार्थ
स्वार्थ में !
हद तो तब होती है !
जब……………….
प्रीत ! बेवफा हो जाती है !
तब आता है……..
एक परिवर्तन
और हिला देता है अन्तस को
इस कदर जैसे……………..
सुनामी आती है दरिया में
और
ले जाती है बहाकर !
परिवर्तन की धाराओं के साथ
वो एहसास !
वो प्रीत !
वो यादें !
वो कस्में !
और वो वादे !
पर जोर नहीं है ?
इस पर किसी का भी………..
क्यों की ?
परिवर्तन प्रकृति का नियम है !!

:::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::
(डॉ०प्रदीप कुमार “दीप”)
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Language: Hindi
254 Views
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