Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
11 May 2024 · 1 min read

परम्परा को मत छोडो

परम्परा को मत छोडो
पर नव पथ भी अपना लो
जिस पर चलकर नव भारत को
बुलन्दियों तक पहुँचा दो
कोई भी ना छू पाये हमको
सम्पूर्ण विश्व में,
तिरंगे का परचम लहरा दो
स्मरण दिलाती है पुर्खो की
परम्पराये तो
पर नव पथ पर चलकर
भारत के भविष्य को निखार लो
तुम हरपल स्मरण रखो
परम्मपराओ के बंधन को
लेकिन इसके साथ-साथ
नव भारत के निर्माण के लिए
भ्रातत्व की भावना को लेकर
अन्याय किसी पर ना देखो
दिनेश कुमार गंगवार

Language: Hindi
2 Likes · 25 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
अनकहा रिश्ता (कविता)
अनकहा रिश्ता (कविता)
Monika Yadav (Rachina)
परमूल्यांकन की न हो
परमूल्यांकन की न हो
Dr fauzia Naseem shad
18)”योद्धा”
18)”योद्धा”
Sapna Arora
युवा है हम
युवा है हम
Pratibha Pandey
23/82.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/82.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
60 के सोने में 200 के टलहे की मिलावट का गड़बड़झाला / MUSAFIR BAITHA
60 के सोने में 200 के टलहे की मिलावट का गड़बड़झाला / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
*बहुत जरूरी बूढ़ेपन में, प्रियतम साथ तुम्हारा (गीत)*
*बहुत जरूरी बूढ़ेपन में, प्रियतम साथ तुम्हारा (गीत)*
Ravi Prakash
-अपनी कैसे चलातें
-अपनी कैसे चलातें
Seema gupta,Alwar
बिन माली बाग नहीं खिलता
बिन माली बाग नहीं खिलता
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
मनहरण घनाक्षरी
मनहरण घनाक्षरी
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
हम भी अगर बच्चे होते
हम भी अगर बच्चे होते
नूरफातिमा खातून नूरी
क्यों ? मघुर जीवन बर्बाद कर
क्यों ? मघुर जीवन बर्बाद कर
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
आसान होते संवाद मेरे,
आसान होते संवाद मेरे,
Swara Kumari arya
किसी मुस्क़ान की ख़ातिर ज़माना भूल जाते हैं
किसी मुस्क़ान की ख़ातिर ज़माना भूल जाते हैं
आर.एस. 'प्रीतम'
बह्र ## 2122 2122 2122 212 फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन काफिया ## आते रदीफ़ ## रहे
बह्र ## 2122 2122 2122 212 फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन काफिया ## आते रदीफ़ ## रहे
Neelam Sharma
सबके सामने रहती है,
सबके सामने रहती है,
लक्ष्मी सिंह
"डीजे"
Dr. Kishan tandon kranti
सूखी टहनियों को सजा कर
सूखी टहनियों को सजा कर
Harminder Kaur
जब ज्ञान स्वयं संपूर्णता से परिपूर्ण हो गया तो बुद्ध बन गये।
जब ज्ञान स्वयं संपूर्णता से परिपूर्ण हो गया तो बुद्ध बन गये।
manjula chauhan
मिट्टी के परिधान सब,
मिट्टी के परिधान सब,
sushil sarna
स्पर्श
स्पर्श
Ajay Mishra
माॅं लाख मनाए खैर मगर, बकरे को बचा न पाती है।
माॅं लाख मनाए खैर मगर, बकरे को बचा न पाती है।
महेश चन्द्र त्रिपाठी
प्रतीक्षा
प्रतीक्षा
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
कविता (आओ तुम )
कविता (आओ तुम )
Sangeeta Beniwal
अभी तो साँसें धीमी पड़ती जाएँगी,और बेचैनियाँ बढ़ती जाएँगी
अभी तो साँसें धीमी पड़ती जाएँगी,और बेचैनियाँ बढ़ती जाएँगी
पूर्वार्थ
संबंधो में अपनापन हो
संबंधो में अपनापन हो
संजय कुमार संजू
ऐ मोहब्बत तेरा कर्ज़दार हूं मैं।
ऐ मोहब्बत तेरा कर्ज़दार हूं मैं।
Phool gufran
संसार में
संसार में
Brijpal Singh
जीवन यात्रा
जीवन यात्रा
विजय कुमार अग्रवाल
मेरे दिल की हर धड़कन तेरे ख़ातिर धड़कती है,
मेरे दिल की हर धड़कन तेरे ख़ातिर धड़कती है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
Loading...