Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
29 Jul 2016 · 1 min read

….. .. पद ……

भगवन!क्यों नहिं दर्शन पाऊँ ।
योग मंत्र श्रुति ग्रन्थ न जानू , कैसे तुमको ध्याऊँ ?
मृदु-पद उन्मुख सतत् हृदय में , मूरति मञ्जु सजाऊँ ।
सजल नयन अवरुद्ध कण्ठ से , कैसे मैं गुण गाऊँ ?
असुर कुपित पतितों को तारा , कैसे यह बिसराऊँ ?
राम रटूँ शिव श्याम मान सम , मुरली मधुर बजाऊँ ।
अगणित जीवन वार चुका , अब, हठ कर प्राण गवाऊँ ।

Language: Hindi
525 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
इंसानियत
इंसानियत
ओमप्रकाश भारती *ओम्*
2887.*पूर्णिका*
2887.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
गुरूर चाँद का
गुरूर चाँद का
Satish Srijan
ज़िंदगी पर तो
ज़िंदगी पर तो
Dr fauzia Naseem shad
इतिहास गवाह है
इतिहास गवाह है
शेखर सिंह
कृष्ण जी के जन्म का वर्णन
कृष्ण जी के जन्म का वर्णन
Ram Krishan Rastogi
जिंदगी को मेरी नई जिंदगी दी है तुमने
जिंदगी को मेरी नई जिंदगी दी है तुमने
Er. Sanjay Shrivastava
श्रृंगारिक दोहे
श्रृंगारिक दोहे
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
अगर सक्सेज चाहते हो तो रुककर पीछे देखना छोड़ दो - दिनेश शुक्
अगर सक्सेज चाहते हो तो रुककर पीछे देखना छोड़ दो - दिनेश शुक्
dks.lhp
*सुनहरे स्वास्थ्य से अच्छा, सुनहरा पल नहीं होता(मुक्तक)*
*सुनहरे स्वास्थ्य से अच्छा, सुनहरा पल नहीं होता(मुक्तक)*
Ravi Prakash
हर एक मन्जर पे नजर रखते है..
हर एक मन्जर पे नजर रखते है..
कवि दीपक बवेजा
माँ तुम्हारे रूप से
माँ तुम्हारे रूप से
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
हे परम पिता परमेश्वर,जग को बनाने वाले
हे परम पिता परमेश्वर,जग को बनाने वाले
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अमर स्वाधीनता सैनानी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
अमर स्वाधीनता सैनानी डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
कवि रमेशराज
#शुभ_दिवस
#शुभ_दिवस
*Author प्रणय प्रभात*
"आँसू"
Dr. Kishan tandon kranti
ख्वाहिशें आँगन की मिट्टी में, दम तोड़ती हुई सी सो गयी, दरार पड़ी दीवारों की ईंटें भी चोरी हो गयीं।
ख्वाहिशें आँगन की मिट्टी में, दम तोड़ती हुई सी सो गयी, दरार पड़ी दीवारों की ईंटें भी चोरी हो गयीं।
Manisha Manjari
अर्थ  उपार्जन के लिए,
अर्थ उपार्जन के लिए,
sushil sarna
मुक्तक
मुक्तक
Er.Navaneet R Shandily
मौन
मौन
लक्ष्मी सिंह
जी करता है , बाबा बन जाऊं – व्यंग्य
जी करता है , बाबा बन जाऊं – व्यंग्य
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
# जय.….जय श्री राम.....
# जय.….जय श्री राम.....
Chinta netam " मन "
मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
Anis Shah
तुम कभी यह चिंता मत करना कि हमारा साथ यहाँ कौन देगा कौन नहीं
तुम कभी यह चिंता मत करना कि हमारा साथ यहाँ कौन देगा कौन नहीं
Dr. Man Mohan Krishna
राम पर हाइकु
राम पर हाइकु
Sandeep Pande
मंगल मय हो यह वसुंधरा
मंगल मय हो यह वसुंधरा
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
संस्कार संस्कृति सभ्यता
संस्कार संस्कृति सभ्यता
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
याद तो हैं ना.…...
याद तो हैं ना.…...
Dr Manju Saini
सुकरात के शागिर्द
सुकरात के शागिर्द
Shekhar Chandra Mitra
मैं फक्र से कहती हू
मैं फक्र से कहती हू
Naushaba Suriya
Loading...