Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Write
Notifications
Wall of Fame
Jul 29, 2016 · 1 min read

पतन

हमारा आध्यात्म कमजोर हुआ
हमारी संस्कृति अपंग होने लगी
फिर सभ्यता खोने लगी
नारी तब रोने लगी।
पतन फिर होने लगा
मार्ग पथभ्रष्ट हो गया
इंसान जब बिकने लगा
बेमौत भी मरने लगा
स्मिथ को पड़ने लगे
चाणक्य को खोने लगे
तक्षशिला जलने लगा
J.n.u.बनने लगा
बेसुरी राग ताल में
कन्हैया बजने लगा
गौरी ज़ाकिर हो गए
गुरुवर सभी तब सो गए
ज्ञान अब धूमिल हुआ
प्रेम भी कातिल हुआ
रिश्ते स्वार्थी हो गए
लोभ में डूबे रहे
रक्त श्वेत होने लगा
लज़्ज़ा भी रोने लगी
आबरू लूटने लगी
समय अभी भी शेष है
कह रहा विशेष है
खुद को तुम पहचान लो
महाकाल हो मान लो
बनकर काली दुर्गा भी
दुष्टों का संहार करो…………अपूर्ण

स्वरचित 21जुलाई2016

220 Views
You may also like:
श्रीराम गाथा
मनोज कर्ण
दर्द।
Taj Mohammad
बुआ आई
राजेश 'ललित'
तुम्हारी चाय की प्याली / लवकुश यादव "अज़ल"
लवकुश यादव "अज़ल"
The Magical Darkness
Manisha Manjari
वो कली मासूम
सूर्यकांत द्विवेदी
शोहरत नही मिली।
Taj Mohammad
#क्या_पता_मैं_शून्य_न_हो_जाऊं
D.k Math
मिला है जब से साथ तुम्हारा
Ram Krishan Rastogi
अर्धनारीश्वर की अवधारणा...?
मनोज कर्ण
इच्छाओं का घर
Anamika Singh
पितृ स्तुति
दुष्यन्त 'बाबा'
प्यार के फूल....
Dr. Alpa H. Amin
ग़ज़ल -
Mahendra Narayan
यूं तुम मुझमें जज़्ब हो गए हो।
Taj Mohammad
“ हमर महिसक जन्म दिन पर आशीर्वाद दियोनि ”
DrLakshman Jha Parimal
संकोच - कहानी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
✍️कबीरा बोल...✍️
"अशांत" शेखर
दो बिल्लियों की लड़ाई (हास्य कविता)
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
श्रंगार के वियोगी कवि श्री मुन्नू लाल शर्मा और उनकी...
Ravi Prakash
सारे निशां मिटा देते हैं।
Taj Mohammad
*बुलाता रहा (आध्यात्मिक गीतिका)*
Ravi Prakash
"अंतरात्मा"
Dr. Alpa H. Amin
गाँव के रंग में
सिद्धार्थ गोरखपुरी
अपना भारत देश महान है।
Taj Mohammad
कन्या रूपी माँ अम्बे
Kanchan Khanna
कर्मगति
Shyam Sundar Subramanian
✍️"सूरज"और "पिता"✍️
"अशांत" शेखर
छंदों में मात्राओं का खेल
Subhash Singhai
रिश्तों में बढ रही है दुरियाँ
Anamika Singh
Loading...