Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 May 2023 · 1 min read

निराशा एक आशा

घिरे निराशा के बादल तो क्या हुआ।
काली है घनघोर घटा तो क्या हुआ।
हरियाली भरी आशा फिर हर्षायेगी।
जब यह गरज बरस यूँ चली जाएगी ।। घिरे निराशा के बादल—–
घनी अमावस निशा तो क्या हुआ।
छोड़ा चाँद सहारा तो क्या हुआ।
यहाँ कुछ सफ़र है तारो के सहारे ,
किरणो की भोर के फिर होंगे नजारे।। घिरे निराशा के बादल—–
चले है जब हम पथरीली राहो पर।
कंटक प्रस्तर तो होंगे ही राहो पर।
सीधे मिले मंजिल, चलना क्या हुआ,
बिन ठोकर लगे, संभलना क्या हुआ।। घिरे निराशा के बादल—–
कच्चे मन के द्वन्द से हम क्यों हारे।
कोशिश बिन ही हारे डर से क्यों हारे।
स्पर्धा इस दौड़ में पिछड़ भी जाते है,
फिर भी हम दौड़ तो सीख ही जाते है । घिरे निराशा के बादल—–
परिवर्तन है देखो बयार भी बदलेगी।
पतझड़ की शुष्क रूसवाई बदलेगी।
स्फुटित होगी कोपल,तरूणाई खिलेगी,
कोयल सुर बसन्त अमराई भी खिलेगी।। घिरे निराशा के बादल—–
(लेखक- डॉ शिव ‘लहरी’)

Language: Hindi
356 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डॉ. शिव लहरी
View all
You may also like:
बातों का तो मत पूछो
बातों का तो मत पूछो
Rashmi Ranjan
नव वर्ष पर सबने लिखा
नव वर्ष पर सबने लिखा
Harminder Kaur
** पर्व दिवाली **
** पर्व दिवाली **
surenderpal vaidya
जमाना खराब हैं....
जमाना खराब हैं....
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
मैं सोचता हूँ आखिर कौन हूॅ॑ मैं
मैं सोचता हूँ आखिर कौन हूॅ॑ मैं
VINOD CHAUHAN
संगठन
संगठन
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
सृजन
सृजन
Rekha Drolia
*रामपुर के राजा रामसिंह (नाटक)*
*रामपुर के राजा रामसिंह (नाटक)*
Ravi Prakash
वर्षा रानी⛈️
वर्षा रानी⛈️
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
Ranjeet Shukla
Ranjeet Shukla
Ranjeet Kumar Shukla
2939.*पूर्णिका*
2939.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
☄️💤 यादें 💤☄️
☄️💤 यादें 💤☄️
Dr Manju Saini
।। समीक्षा ।।
।। समीक्षा ।।
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
हाइकु शतक (हाइकु संग्रह)
हाइकु शतक (हाइकु संग्रह)
Dr. Pradeep Kumar Sharma
रिटायमेंट (शब्द चित्र)
रिटायमेंट (शब्द चित्र)
Suryakant Dwivedi
हसीब सोज़... बस याद बाक़ी है
हसीब सोज़... बस याद बाक़ी है
अरशद रसूल बदायूंनी
स्वयं से तकदीर बदलेगी समय पर
स्वयं से तकदीर बदलेगी समय पर
महेश चन्द्र त्रिपाठी
योग का एक विधान
योग का एक विधान
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
वंदना
वंदना
Rashmi Sanjay
जिंदगी और जीवन तो कोरा कागज़ होता हैं।
जिंदगी और जीवन तो कोरा कागज़ होता हैं।
Neeraj Agarwal
'शत्रुता' स्वतः खत्म होने की फितरत रखती है अगर उसे पाला ना ज
'शत्रुता' स्वतः खत्म होने की फितरत रखती है अगर उसे पाला ना ज
satish rathore
बृद्ध  हुआ मन आज अभी, पर यौवन का मधुमास न भूला।
बृद्ध हुआ मन आज अभी, पर यौवन का मधुमास न भूला।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
💐प्रेम कौतुक-165💐
💐प्रेम कौतुक-165💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
स्त्री श्रृंगार
स्त्री श्रृंगार
विजय कुमार अग्रवाल
"नेशनल कैरेक्टर"
Dr. Kishan tandon kranti
चाटुकारिता
चाटुकारिता
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मैं तुलसी तेरे आँगन की
मैं तुलसी तेरे आँगन की
Shashi kala vyas
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
कि दे दो हमें मोदी जी
कि दे दो हमें मोदी जी
Jatashankar Prajapati
#लघुकथा- चुनावी साल, वही बवाल
#लघुकथा- चुनावी साल, वही बवाल
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...