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6 Jun 2023 · 1 min read

सुरसा-सी नित बढ़ रही, लालच-वृत्ति दुरंत।

सुरसा-सी नित बढ़ रही, लालच-वृत्ति दुरंत।
कहाँ रुकेगी लालसा, कहाँ स्वार्थ का अंत ?।।

रख मत जोड़बटोर कर, नश्वर सब सुखसाज।
माटी में मिलते दिखे, कितने तख्तोताज।।

लिप्सा तज संतोष-धन, मन में करो निवेश।
शाश्वत सुख की संपदा, हर लेती हर क्लेश।।

© सीमा अग्रवाल

Language: Hindi
2 Likes · 288 Views
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