Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
30 Mar 2017 · 1 min read

नहीं हुआ स्पर्श धूप का

गीत
नहीं हुआ स्पर्श धूप का ,
मेरे घर और आंगन में ।

किया न चुंबन रवि किरणों ने ,
झड़ती इन पंखुड़ियों का ।
अज़ब निराशा में है, जीवन,
नव-कोमल इन कलियों का ।
पत्ते नहीं खरकते हैं , अब
इस घर के वातायन में ।

कंटक भी अब त्याग दिए हैं ,
पूर्ण हताश़ा में , बबूल ने ।
नष्ट किया आनंद फूल का ,
किसी चूक ने, किसी भूल ने ।
कौन करे ? अब फल की आशा,
उजड़े-उजड़े-से ग़ुलश़न में ।

शेष नहीं अब कोई आशा ,
नव-तरुओं के हंसने की ।
चिंतित और दुखित है जंगल,
उसे फ़िक्र है कटने की ।
कौन रखेगा? प्रेम-पुष्प अब,
मानवता के दामन में ।

नहीं हुआ स्पर्श धूप का ,
मेरे घर और आंगन में ।
ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवं शिक्षक ।

Language: Hindi
Tag: गीत
4 Likes · 2 Comments · 867 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
फुलों कि  भी क्या  नसीब है साहब,
फुलों कि भी क्या नसीब है साहब,
Radha jha
स्वच्छ देश अभियान में( बाल कविता)
स्वच्छ देश अभियान में( बाल कविता)
Ravi Prakash
" तुम्हारे इंतज़ार में हूँ "
Aarti sirsat
अकेले
अकेले
Dr.Pratibha Prakash
आज़ादी का जश्न
आज़ादी का जश्न
Shekhar Chandra Mitra
"एक शोर है"
Lohit Tamta
आइए जनाब
आइए जनाब
Surinder blackpen
2273.
2273.
Dr.Khedu Bharti
छोड़ कर तुम मुझे किधर जाओगे
छोड़ कर तुम मुझे किधर जाओगे
Anil chobisa
खुशी पाने की जद्दोजहद
खुशी पाने की जद्दोजहद
डॉ० रोहित कौशिक
अपने साथ तो सब अपना है
अपने साथ तो सब अपना है
Dheerja Sharma
जागता हूँ क्यों ऐसे मैं रातभर
जागता हूँ क्यों ऐसे मैं रातभर
gurudeenverma198
न बदले...!
न बदले...!
Srishty Bansal
---- विश्वगुरु ----
---- विश्वगुरु ----
सूरज राम आदित्य (Suraj Ram Aditya)
कलियुग है
कलियुग है
Sanjay ' शून्य'
बॉर्डर पर जवान खड़ा है।
बॉर्डर पर जवान खड़ा है।
Kuldeep mishra (KD)
नारी पुरुष
नारी पुरुष
Neeraj Agarwal
ज़िक्र तेरा लबों पर क्या आया
ज़िक्र तेरा लबों पर क्या आया
Dr fauzia Naseem shad
गुरु मेरा मान अभिमान है
गुरु मेरा मान अभिमान है
Harminder Kaur
बाबागिरी
बाबागिरी
Dr. Pradeep Kumar Sharma
बिन बोले ही  प्यार में,
बिन बोले ही प्यार में,
sushil sarna
मानव तेरी जय
मानव तेरी जय
Sandeep Pande
मोहन कृष्ण मुरारी
मोहन कृष्ण मुरारी
Mamta Rani
अधीर मन
अधीर मन
manisha
Needs keep people together.
Needs keep people together.
सिद्धार्थ गोरखपुरी
ग़ज़ल- हूॅं अगर मैं रूह तो पैकर तुम्हीं हो...
ग़ज़ल- हूॅं अगर मैं रूह तो पैकर तुम्हीं हो...
अरविन्द राजपूत 'कल्प'
■ ज्वलंत सवाल
■ ज्वलंत सवाल
*Author प्रणय प्रभात*
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
मजदूर हैं हम मजबूर नहीं
मजदूर हैं हम मजबूर नहीं
नेताम आर सी
बारिश
बारिश
Punam Pande
Loading...