Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Jul 2023 · 1 min read

नहीं चाहता मैं यह

नहीं चाहता मैं यह,
कि सबसे दुश्मनी हो तुम्हारी,
और लोग लगाये तुम पर इल्जाम,
कल को मेरी वजह से।

नहीं चाहता मैं यह,
कि तुम हो बर्बादी की कगार पर,
काँटों का हार पहने हुए,
निहत्थे सैनिक की भांति,
कल को मेरी वजह से।

नहीं चाहता मैं यह,
कि टूट जाये मेरे तार,
दुनियादारी और प्रमोद से,
और करता रहूँ मैं बातें,
सिर्फ अपने कुटुम्ब की।

नहीं चाहता मैं यह,
कि कर ले तू समझौता,
कल बुराई और अपवित्रता से,
अपना घर बड़ा बनाने के लिए,
पलभर के सुख- सुकून के लिए।

नहीं चाहता मैं यह,
कि तोड़ना पड़े मुझको एक दिन,
तुमसे यह मुलाकात और प्रेम,
तुम्हारी अति महत्वकांक्षा के लिए,
किसी गलत रास्ते पर तुमको देखकर।

शिक्षक एवं साहित्यकार-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)

Language: Hindi
192 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
सत्तावन की क्रांति का ‘ एक और मंगल पांडेय ’
सत्तावन की क्रांति का ‘ एक और मंगल पांडेय ’
कवि रमेशराज
इश्क़ के नाम पर धोखा मिला करता है यहां।
इश्क़ के नाम पर धोखा मिला करता है यहां।
Phool gufran
प्रकृति
प्रकृति
Sûrëkhâ
*
*"हिंदी"*
Shashi kala vyas
जय संविधान...✊🇮🇳
जय संविधान...✊🇮🇳
Srishty Bansal
23/171.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/171.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
समस्या का समाधान
समस्या का समाधान
Paras Nath Jha
तुम्हीं हो
तुम्हीं हो
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
ਮੁਕ ਜਾਣੇ ਨੇ ਇਹ ਸਾਹ
ਮੁਕ ਜਾਣੇ ਨੇ ਇਹ ਸਾਹ
Surinder blackpen
मैं फकीर ही सही हूं
मैं फकीर ही सही हूं
Umender kumar
आज फिर से
आज फिर से
Madhuyanka Raj
आखरी है खतरे की घंटी, जीवन का सत्य समझ जाओ
आखरी है खतरे की घंटी, जीवन का सत्य समझ जाओ
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
दो साँसों के तीर पर,
दो साँसों के तीर पर,
sushil sarna
"घूंघट नारी की आजादी पर वह पहरा है जिसमे पुरुष खुद को सहज मह
डॉ.एल. सी. जैदिया 'जैदि'
*पापी पेट के लिए *
*पापी पेट के लिए *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
उसका प्यार
उसका प्यार
Dr MusafiR BaithA
नेपालीको गर्व(Pride of Nepal)
नेपालीको गर्व(Pride of Nepal)
Sidhartha Mishra
*घर-घर में अब चाय है, दिनभर दिखती आम (कुंडलिया)*
*घर-घर में अब चाय है, दिनभर दिखती आम (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
होगे बहुत ज़हीन, सवालों से घिरोगे
होगे बहुत ज़हीन, सवालों से घिरोगे
Shweta Soni
🙅fact🙅
🙅fact🙅
*प्रणय प्रभात*
"शहनाई की गूंज"
Dr. Kishan tandon kranti
زندگی کب
زندگی کب
Dr fauzia Naseem shad
सत्यता और शुचिता पूर्वक अपने कर्तव्यों तथा दायित्वों का निर्
सत्यता और शुचिता पूर्वक अपने कर्तव्यों तथा दायित्वों का निर्
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
मरने वालों का तो करते है सब ही खयाल
मरने वालों का तो करते है सब ही खयाल
shabina. Naaz
चाय-दोस्ती - कविता
चाय-दोस्ती - कविता
Kanchan Khanna
पानी का संकट
पानी का संकट
Seema gupta,Alwar
खुदा ने ये कैसा खेल रचाया है ,
खुदा ने ये कैसा खेल रचाया है ,
Sukoon
प्रेम पथ का एक रोड़ा 🛣️🌵🌬️
प्रेम पथ का एक रोड़ा 🛣️🌵🌬️
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
मैं जानता हूं नफरतों का आलम क्या होगा
मैं जानता हूं नफरतों का आलम क्या होगा
VINOD CHAUHAN
अखंड साँसें प्रतीक हैं, उद्देश्य अभी शेष है।
अखंड साँसें प्रतीक हैं, उद्देश्य अभी शेष है।
Manisha Manjari
Loading...