Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Mar 2020 · 1 min read

नवगीत

मित्रो ! ‘कोरोना’ की बिछली यानि कि फिसलन में आजकल सभी साहित्यकारों के शब्द फिसल रहे हैं, मेरी लेखनी से फिसले शब्द:-
*
अरे ! कोरोना ! तुझे नमस्ते
*
खेत पके होंगे गेहूँ के
चले गाँव हम,
खटनी-कटनी-कटिया करने,
अरे ! कोरोना ! तुझे नमस्ते.
*
शहर बंद है, बैठे-बैठे
तंग करेगी भूख-मजूरी,
तंग करेंगे हाथ-पैर ये,
सामाजिकता की वह दूरी,
ठेला पड़ा रहेगा घर में,
चले गाँव हम,
आलू-मेथी-धनिया करने
अरे ! कोरोना ! तुझे नमस्ते.
*
छुआ-छूत सड़कों तक उतरी,
और चटखनी डरा रही है,
मिलना-जुलना बंद हुआ है,
गौरैया भी परा रही है,
शंका में जब मानवता है,
चले गाँव हम,
छानी-छप्पर-नरिया करने,
अरे ! कोरोना ! तुझे नमस्ते.
*
मुँह पर मास्क लगा हर कोई,
साँसों की चिंता करता है,
स्वयं सुरक्षितता की खातिर,
आचारिक हिंसा करता है,
इन सामाजिक बदलावों से,
चले गाँव हम,
पटनी-पाटा-खटिया करने,
अरे ! कोरोना ! तुझे नमस्ते.
*
स्वाभिमान की हम खाते हैं,
नहीं किसी की मदद चाहिए,
एक माह का राशन-पानी,
एक हजारी नगद चाहिए,
हम अपने मन के मालिक हैं.
चले गाँव हम,
बुधई-बुधिया-हरिया करने,
अरे ! कोरोना ! तुझे नमस्ते.
*
31.03.2020
*
शिवानन्द सिंह ‘सहयोगी’
मेरठ

Language: Hindi
546 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
क्या लिखते हो ?
क्या लिखते हो ?
Atul "Krishn"
सफलता
सफलता
Paras Nath Jha
हमें सलीका न आया।
हमें सलीका न आया।
Taj Mohammad
!! घड़ी समर की !!
!! घड़ी समर की !!
Chunnu Lal Gupta
*सुख-दुख के दोहे*
*सुख-दुख के दोहे*
Ravi Prakash
लौट आयी स्वीटी
लौट आयी स्वीटी
Kanchan Khanna
इंसान जिंहें कहते
इंसान जिंहें कहते
Dr fauzia Naseem shad
Don't bask in your success
Don't bask in your success
सिद्धार्थ गोरखपुरी
कैसा कोलाहल यह जारी है....?
कैसा कोलाहल यह जारी है....?
पाण्डेय चिदानन्द "चिद्रूप"
शब्द
शब्द
Sûrëkhâ
2321.पूर्णिका
2321.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
"विजेता"
Dr. Kishan tandon kranti
समय के खेल में
समय के खेल में
Dr. Mulla Adam Ali
ऐ मोहब्बत तेरा कर्ज़दार हूं मैं।
ऐ मोहब्बत तेरा कर्ज़दार हूं मैं।
Phool gufran
Finding alternative  is not as difficult as becoming alterna
Finding alternative is not as difficult as becoming alterna
Sakshi Tripathi
परछाई
परछाई
Dr Parveen Thakur
पुस्तक
पुस्तक
Vedha Singh
नदी की करुण पुकार
नदी की करुण पुकार
Anil Kumar Mishra
चाहते नहीं अब जिंदगी को, करना दुःखी नहीं हरगिज
चाहते नहीं अब जिंदगी को, करना दुःखी नहीं हरगिज
gurudeenverma198
■ आज का शेर अपने यक़ीन के नाम।
■ आज का शेर अपने यक़ीन के नाम।
*प्रणय प्रभात*
** समय कीमती **
** समय कीमती **
surenderpal vaidya
इम्तहान दे कर थक गया , मैं इस जमाने को ,
इम्तहान दे कर थक गया , मैं इस जमाने को ,
Neeraj Mishra " नीर "
प्रकृति
प्रकृति
Monika Verma
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
सत्य तत्व है जीवन का खोज
सत्य तत्व है जीवन का खोज
Buddha Prakash
एक ही भूल
एक ही भूल
Mukesh Kumar Sonkar
इच्छाएं.......
इच्छाएं.......
पूर्वार्थ
कोरोना का संहार
कोरोना का संहार
Dr. Pradeep Kumar Sharma
मुस्कुराओ तो सही
मुस्कुराओ तो सही
अभिषेक पाण्डेय 'अभि ’
मेरी माटी मेरा देश
मेरी माटी मेरा देश
Dr Archana Gupta
Loading...