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5 Nov 2023 · 1 min read

नन्हें बच्चे को जब देखा

नन्हें बच्चे को जब देखा
चंद सिक्कों के साथ !
चहक रहा था नन्हा बचपन
मिली हो ज्यूँ सौगात !

सिक्का फिसला दूर जा गिरा
पीछे नन्हीं जान!
सिक्का ही अब उसको लगता
जीवन की पहचान!

कभी उठाता कभी गिराता
रहा नींद भर साथ !
इतनी कसकर बांधी मुट्ठी
छुड़ा न पाए हाथ!

छला गया फिर भोला बचपन
सिक्कों में बस गई जान !
मन आहत हो रहा देखता
खोता बचपन पहचान !

@सुस्मिता सिंह ‘काव्यमय’

1 Like · 143 Views
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