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4 Jul 2023 · 1 min read

नजरों को बचा लो जख्मों को छिपा लो,

नजरों को बचा लो जख्मों को छिपा लो,
कब तक खुद को छिपाकर रख पाओगे,
चेहरा तो है पाँच पेज की खुली किताब,
किस किस को पढ़ने से रोक पाओगे..।

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