Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
15 May 2024 · 1 min read

धार्मिक होने का मतलब यह कतई नहीं कि हम किसी मनुष्य के आगे नत

धार्मिक होने का मतलब यह कतई नहीं कि हम किसी मनुष्य के आगे नतमस्तक हो जाएं और प्रकृति इतनी तुच्छ वस्तु भी नहीं है कि किसी एक मनुष्य ,एक विचार या एक धर्म में समा जाए । प्रकृति ही ईश्वर है और ईश्वर से जुड़ने का सबसे सीधा उपाय है हम उनसे प्रेम करें । अर्थात हम जीवन के हर उन वस्तुओं से प्रेम करें जिसके कारण हमारा जीवन है । बाकी सब ढकोसला है ।
~विमल

24 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
हर कस्बे हर मोड़ पर,
हर कस्बे हर मोड़ पर,
sushil sarna
कोई हंस रहा है कोई रो रहा है 【निर्गुण भजन】
कोई हंस रहा है कोई रो रहा है 【निर्गुण भजन】
Khaimsingh Saini
मैं बहुतों की उम्मीद हूँ
मैं बहुतों की उम्मीद हूँ
ruby kumari
मुझ जैसा रावण बनना भी संभव कहां ?
मुझ जैसा रावण बनना भी संभव कहां ?
Mamta Singh Devaa
कह न पाई सारी रात सोचती रही
कह न पाई सारी रात सोचती रही
Ram Krishan Rastogi
वो दौर अलग था, ये दौर अलग है,
वो दौर अलग था, ये दौर अलग है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
पूछो हर किसी सेआजकल  जिंदगी का सफर
पूछो हर किसी सेआजकल जिंदगी का सफर
पूर्वार्थ
"दस ढीठों ने ताक़त दे दी,
*Author प्रणय प्रभात*
करके देखिए
करके देखिए
Seema gupta,Alwar
सपनों के सौदागर बने लोग देश का सौदा करते हैं
सपनों के सौदागर बने लोग देश का सौदा करते हैं
प्रेमदास वसु सुरेखा
हंसगति
हंसगति
डॉ.सीमा अग्रवाल
*पेड़*
*पेड़*
Dushyant Kumar
नहीं हम हैं वैसे, जो कि तरसे तुमको
नहीं हम हैं वैसे, जो कि तरसे तुमको
gurudeenverma198
चंद्रयान
चंद्रयान
Mukesh Kumar Sonkar
कुछ भी रहता नहीं है
कुछ भी रहता नहीं है
Dr fauzia Naseem shad
*सूझबूझ के धनी : हमारे बाबा जी लाला भिकारी लाल सर्राफ* (संस्मरण)
*सूझबूझ के धनी : हमारे बाबा जी लाला भिकारी लाल सर्राफ* (संस्मरण)
Ravi Prakash
जिंदगी एक किराये का घर है।
जिंदगी एक किराये का घर है।
ज्ञानीचोर ज्ञानीचोर
तेवरी में करुणा का बीज-रूप +रमेशराज
तेवरी में करुणा का बीज-रूप +रमेशराज
कवि रमेशराज
वार्तालाप
वार्तालाप
Shyam Sundar Subramanian
"अदृश्य शक्ति"
Ekta chitrangini
"भूल गए हम"
Dr. Kishan tandon kranti
मुख्तलिफ होते हैं ज़माने में किरदार सभी।
मुख्तलिफ होते हैं ज़माने में किरदार सभी।
Phool gufran
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
मानव जीवन में जरूरी नहीं
मानव जीवन में जरूरी नहीं
Dr.Rashmi Mishra
मंज़िलों से गुमराह भी कर देते हैं कुछ लोग.!
मंज़िलों से गुमराह भी कर देते हैं कुछ लोग.!
शेखर सिंह
दुखों से दोस्ती कर लो,
दुखों से दोस्ती कर लो,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
2755. *पूर्णिका*
2755. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
एक फूल खिला आगंन में
एक फूल खिला आगंन में
shabina. Naaz
Fantasies are common in this mystical world,
Fantasies are common in this mystical world,
Sukoon
कुंडलिया छंद
कुंडलिया छंद
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
Loading...