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5 Oct 2022 · 1 min read

*द्वार आलीशान है(गीतिका)*

द्वार आलीशान है(गीतिका)
“””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
(1)
घुप्प अन्धेरा है छाया, रास्ता सुनसान है
टूटी सड़क पर मुँह चिढ़ाता, द्वार आलीशान है
( 2 )

कर्ज लेकर कर रहे हैं आप महँगी शादियाँ
सोचकर तो देखिए यह सिर्फ झूठी शान है
( 3 )
सबने मिलकर था भगाया देश से अंग्रेज को
इसलिए कहता हूँ सबका देश हिन्दुस्तान है
( 4 )
एक शुभचिन्तक की महँगी पड़ गई मध्यस्थता
बँट गया सब घर का आँगन, बँट गया दालान है
(5)
जिसकी खाई रोटियाँ, उसकी वफादारी भी की
आज भी कुत्ता है कुत्ता, सोचता इन्सान है
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””””
रचयिताः रवि प्रकाश,
बाजार सर्राफा, रामपुर
9997615451

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