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19 Nov 2023 · 1 min read

दो शे’र

मुहब्बत को ज़रूरी काम लिख रहा हूँ ।
हथेली पर मैं तिरा नाम लिख रहा हूँ ।।

किया था आग़ाज़ तिरे साथ में जिसका ।
उसी कहानी का मैं अंजाम लिख रहा हूँ ।।

©डॉ वासिफ़ काज़ी , इंदौर
©काज़ी की क़लम

Language: Hindi
Tag: शेर
156 Views
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