Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
23 May 2016 · 1 min read

दो मुक्तक –आँख से बहते समन्दर …

आँख से बहते समंदर की रवानी है बहुत
प्यास फिर भी बुझ न पायी खारा पानी है बहुत
पास जाकर भी परखना जानना भी सत्य को
दूर से हर शय यहाँ लगती सुहानी है बहुत

बस राग ही अपने हमें गाने नहीं आते
सीने में छिपे जख्म दिखाने नहीं आते
पीने पड़े हैं दर्द ये सब इसलिये दिल को
आँखों से जो ये दर्द बहाने नहीं आते

डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद (उ प्र)

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
1 Like · 344 Views
You may also like:
जहां पर रब नही है
अनूप अंबर
“अच्छे दिन आने वाले है” आ गये किसानो के अच्छे...
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
फासले
Seema 'Tu hai na'
अतिथि तुम कब जाओगे
Gouri tiwari
तुमसे थी उम्मीद
Anamika Singh
शिकायत खुद से है अब तो......
डॉ. अनिल 'अज्ञात'
सामंत वादियों ने बिछा रखा जाल है।
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
सम्मान- समारोह का पैकेज (हास्य कथा)
Ravi Prakash
धरती कहें पुकार के
Mahender Singh Hans
✍️हुए बेखबर ✍️
Vaishnavi Gupta (Vaishu)
वक़्त और हमारा वर्तमान
मनोज कर्ण
अब सुप्त पड़ी मन की मुरली, यह जीवन मध्य फँसा...
संजीव शुक्ल 'सचिन'
✍️इंसान के पास अपना क्या था?✍️
'अशांत' शेखर
जीवन साथी
जगदीश लववंशी
मुझको मालूम नहीं
gurudeenverma198
🚩🚩रचनाकार "पं बृजेश कुमार नायक" का परिचय"
Pt. Brajesh Kumar Nayak
वो_हमे_हम उन्हें_ याद _आते _रहेंगे
कृष्णकांत गुर्जर
कुछ सोच कर मेरा
Dr fauzia Naseem shad
मुकम्मल ना होते है।
Taj Mohammad
आईना किसी को बुरा नहीं बताता है
कवि दीपक बवेजा
क्या हाल है आजकल
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
आरंभ
Saraswati Bajpai
कहाँ चले गए
Taran Singh Verma
आदि शक्ति
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना
विनोद सिल्ला
सबेरा
डा. सूर्यनारायण पाण्डेय
डर होता है
Abhishek Pandey Abhi
छोटी-छोटी बातों में लड़ते हो तुम।
Buddha Prakash
झुग्गी वाले
Shekhar Chandra Mitra
यहाँ सब बहर में हैं
सूर्यकांत द्विवेदी
Loading...