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21 Nov 2016 · 1 min read

दोहे

प्रभु मेरे क्या हो गया, पटरी नीचे ट्रेन
स्वर्ग सिधारे लोग सौ, यात्री हैं बेचैन |

बच्चे हुए अलग अलग, सन्तति बिन माँ बाप
मिली सजा निर्दोष को, किसका है यह पाप ?

आंसू अब थमता नहीं, रोते बच्चे देख
आश्रय हीन अनाथ को, चाहिए देख रेख |

गहरी निद्रा में मग्न थे, विपदा से अनजान
निद्रा में ही दी गवाँ, अपनी अपनी जान |

रब अब हमें करे कृपा, होकर मेहरवान
घायल लोगों का सभी, बच जाय सकल जान |

©कालीपद ‘प्रसाद’

Language: Hindi
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